जागरण संवाददाता, वाराणसी। हाईस्कूल व इंटर के ज्यादातर परीक्षार्थी प्री-बोर्ड को को गंभीरता से नहीं लेते हैं। छात्रों को मनो-मस्तिष्क में बोर्ड परीक्षा ही छाया रहता रहता। यही नहीं छात्र गृह परीक्षाओं को भी हल्के में लेते है। वहीं कोविड काल में प्री-बोर्ड व होम एग्जाम का महत्व बढ़ा दी। कोविड के कारण सीआइएससीई ही नहीं सीबीएसई व यूपी बोर्ड को भी इस वर्ष 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं निरस्त करनी पड़ी।

प्रधानाचार्यों का कहना है कि काउंसिल फार द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) ने दसवीं (आइसीएसई) व बारहवीं (आइएससी) का रिजल्ट इस बार छात्रों को इस बार पिछली कक्षाओं के औसत अंक के आधार पर जारी किया गया है। कक्षा नौ व 11 की वार्षिक परीक्षा, कक्षा-दस व 12 की अद्र्धवार्षिक व प्री-बोर्ड, यूनिट टेस्ट, प्रोजेक्ट वर्क, आंतरिक मूल्यांकन को रिजल्ट का आधार बनाया गया है। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों के विद्यालयों के रिजल्ट का औसत को भी ध्यान में रखा गया है।

ऐसे में पिछली कक्षाओं ने छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए इस बार उन्हें औसत अंक दिया गया है। वहीं 12वीं के छात्रों को दसवीं बोर्ड परीक्षा को मुख्य आधार बनाया गया है। हालांकि बोर्ड ने परीक्षार्थियों को औसत अंक देने में कई फार्मूला का इस्तेमाल किया है। इसके पीछे छात्रों का अहित न हो सके। अध्यापकों का कहना है कि पिछली बार हाईस्कूल का तीन पेपर की परीक्षा निरस्त कर औसत अंक दिया गया था। ऐसे में पिछली बार ही परीक्षार्थियों को यह संकेत मिल चुके थे कि भविष्य में परीक्षाएं निरस्त कर औसत अंक के आधार पर परिणाम जारी किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी है कि परीक्षा कोई भी हो। सबका महत्व एक समान होता है। ऐसे में पढ़ाई के साथ-साथ परीक्षाओं को गंभीरता से देने की जरूरत है।

Edited By: Abhishek Sharma