उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव जीतने के लक्ष्य के साथ काशी में दो दिन मंथन करेगी भाजपा, पूर्वांचल से सियासी समर की होगी शुरुआत
भाजपा काशी में 14-15 अक्टूबर को पूर्वांचल की 133 विधानसभा सीटों के पदाधिकारियों संग बैठक कर रही है। यह बैठक ...और पढ़ें

यूपी विधानसभा चुनाव 2027: भाजपा काशी में करेगी पूर्वांचल विजय की रणनीति पर मंथन।
HighLights
भाजपा काशी में 2027 चुनाव हेतु रणनीति बना रही है।
पूर्वांचल की 133 सीटों पर मंथन, सपा चुनौती पर फोकस।
राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी बैठक में शामिल।
अशोक सिंह, जागरण वाराणसी। राजनीतिक गलियारों से लेकर चट्टी-चौराहों तक यह चर्चा खूब होती है कि उत्तर प्रदेश की सत्ता का रास्ता पूर्वांचल से होकर गुजरता है। इसी पूर्वी अंचल में भाजपा के काशी और गोरक्ष क्षेत्र आते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सबसे बड़ी अग्नि परीक्षा इस क्षेत्र में ही मानी जा रही है।
ऐसा इसलिए क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ साबित की थी। आजमगढ़ की सभी सीटों पर उसके प्रत्याशियों की जीत हुई थी। कई अन्य जिलों में भी उसने सीटों में बढ़त हासिल की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा पिछड़ गई। इन्हीं चुनावी समीकरणों के कील-कांटें दुरुस्त कर भाजपा काशी क्षेत्र में मजबूत वापसी की जुगत में जुटी है।
इस निमित्त ही 14-15 अक्टूबर को भाजपा ने काशी और गोरक्ष क्षेत्र की 133 विधानसभा सीटों से जुड़े 266 पदाधिकारियों, प्रभारियों व विस्तारकों का प्रशिक्षण शिविर काशी में आयोजित किया है। इसमें राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष, राष्ट्रीय महामंत्री व प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह उन्हें सुनेंगे और अपनी बात रखेंगे।
इसमें प्रत्येक विधानसभा सीट की कमजोरियों व मजबूती के साथ वहां के चुनावी समीकरण पर भी चर्चा होगी। पिछले लोकसभा चुनाव में वाराणसी के कई विधानसभा क्षेत्रों में भी भाजपा के वोटों में कमी आई थी। पिंडरा, अजगरा, शिवपुर विधानसभा सीटों पर कम वोट मिलने के कारण भाजपा लोकसभा की चंदौली और मछली शहर सीटें हार गई। सोनभद्र, गाजीपुर, जौनपुर, घोसी, सलेमपुर आदि सीटों पर भी उसे हार मिली।
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गोरक्ष क्षेत्र के गोरखपुर और बस्ती मंडल की 41 सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया था। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, संतकबीरनगर की सभी और महराजगंज की पांच सीटें जीतकर गोरक्ष क्षेत्र में उसने बढ़त बनाई थी। हालांकि, उसके दूसरे हिस्से आजमगढ़ जिले की सभी 10 सीटों पर उसे हार मिली थी। बलिया व मऊ की ज्यादातर सीटें भी हार गई।
अलबत्ता काशी व गोरक्ष क्षेत्र में भाजपा के सहयोगी दलों अपना दल, निषाद पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया था। इन दलों ने मीरजापुर, भदोही, जौनपुर, संतकबीरनगर, महाराजगंज, गोरखपुर में सफलता हासिल की थी। अब फिर विधानसभा चुनाव के पूर्व भाजपा काशी क्षेत्र में सपा की आक्रमकता को रोकने के लिए मजबूत रणनीति के साथ उतरने की तैयारी कर रही है।
