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DRDO के पास पहुंचा बनारस की छोटी सी साइंट‍िस्‍ट का बड़ा प्रोजेक्‍ट, अप्रूवल म‍िला तो देश का नाम होगा रोशन

By abhishek sharma Edited By: Abhishek sharma
Published: Fri, 23 Oct 2026 06:37 PM (IST)

बनारस की युवा वैज्ञानिक हिरल श्रीवास्तव का एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पीएमओ द्वारा जांच के बाद डीआरडीओ को भेजा गया है। ...और पढ़ें

बनारस की युवा वैज्ञानिक हिरल श्रीवास्तव का प्रोजेक्ट डीआरडीओ पहुंचा।

बनारस की युवा वैज्ञानिक हिरल श्रीवास्तव का प्रोजेक्ट डीआरडीओ पहुंचा।

HighLights

  1. हिरल श्रीवास्तव का बड़ा प्रोजेक्ट डीआरडीओ को भेजा गया।

  2. पीएमओ अधिकारियों ने परियोजना को जांच के बाद बेहतर पाया।

  3. परियोजना को मंजूरी मिलने पर देश का नाम रोशन होगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बनारस की छोटी साइंट‍िस्‍ट ह‍िरल श्रीवास्‍तव का एक बड़ा प्रोजेक्‍ट आख‍िरकार डीआरडीओ के पास पीएमओ के अध‍िकार‍ियों की ओर से भेजा गया है। इन द‍िनों "स्‍त्री रोग नहीं" कैंपेन को लेकर ह‍िरल का नाम चर्चा में है लेक‍िन पीएम नरेन्‍द्र मोदी से इंस्‍पायर्ड ह‍िरल के एक प्रोजेक्‍ट को जो उन्‍हाेंने पहले पीएमओ को भेजा था वह अब वहां के अध‍िकार‍ियों ने जांच के बाद बेहतर पाया और डीआरडीओ को जांच परख के ल‍िए भेजा है। 

माना जा रहा है क‍ि ह‍िरल के इस प्रोजेक्‍ट को मंजूरी म‍िलते ही डीआरडीओ इस पर काम भी शुरू करवा सकता है। इसके मंजूरी म‍ि‍लने के बाद ह‍िरल का नाम बनारस से लेकर व‍िज्ञान की दुन‍िया तक छा जाएगा। हालांक‍ि छोटी सी उम्र में ही ह‍िरल का बड़ा प्रयास रहता है। दैन‍िक जागरण को उन्‍होंने बताया क‍ि वह छोटी थीं तो उन्‍होंने पीएम नरेन्‍द्र मोदी से भी मुलाकात की थी। उनसे प्रेरणा लेकर वह देश के ह‍ित में काम करने को लेकर हमेशा कुछ नया प्‍लान करती रहती हैं। 

kavach

ह‍िरल ने दैन‍िक जागरण को बताया क‍ि उनका प्रोजेक्‍ट 'कवच' पर है ज‍िसका पूरा फुलफार्म ड‍िफेंस के ल‍िए काइनेट‍िक ऑटोनामस व‍िज‍िलेंस एंड साइबरनेट‍िक होमलैंड थीम पर है। उन्‍होंने जागरण को बताया क‍ि 'कवच 2047' आख‍िर क्यों जरूरी है, दरअसल देश को आगे हर जगह और हर मौके पर सुरक्षा के लिए बड़े स्‍तर की शील्‍ड की जरूरत होगी। इसी थीम पर उनकी पर‍ियोजना को डीआरडीओ के पास भेजा गया है। 

ह‍िरल ने जागरण को बताया क‍ि स्वतंत्रता दिवस के 100 साल पूरे होने का जश्न मनाने की एक ओर तैयारी होगी तो दूसरी ओर देश को चुनौती भी झेलना पड़ेगा। बताया क‍ि एक स्वदेशी, इंटेलिजेंट और स्वायत्त सुरक्षा कवच, जिसे भारत को जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस—हर क्षेत्र में लगातार निगरानी और सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसी का नाम कवच है। इस बाबत जागरण को उन्‍हाेंने स्‍पष्‍ट क‍िया क‍ि तकनीकी जानकारी कत‍िपय वजहों से वह साझा नहीं कर सकती हैं। 

बताया क‍ि "एक संप्रभु भारत के लिए एक इंटेलिजेंट सुरक्षा कवच" के तौर पर इसे ड‍िजाइन कर कुछ द‍िनों पूर्व पीएमओ को भेजा था। सेंट जांस स्‍कूल की 12 वीं की ह‍िरल के साथ इस प्रोजेक्‍ट में रुद्रप्रताप स‍िंह, आद‍ित्‍य श्रीवास्‍तव, पार्थ मौर्या आद‍ि हैं जबक‍ि टीम को लीड ह‍िरल कर रही हैं। बताया क‍ि त्र‍िनेत्र पहले नाम था ज‍िसे अब भाई कुमार श्रेय के कहने पर नाम कवच कर द‍िया गया है।

बताया क‍ि इसका प्रैक्‍ट‍िकल हो चुका है और कंपटीशन के बाद पर‍ियोजना को पीएमओ को भेजा तो वहां के अध‍िकारी का पत्र आया। जहां से डीआरडीओ को लेटर भेज द‍िया गया ज‍िसकी पुष्‍ट‍ि करते हुए डीआरडीओ ने भी ह‍िरल को लेटर भेजा है। अब जांच के बाद अप्रूवल म‍िला तो इस पर‍ियोजना पर काम शुरू करने की स्‍थ‍ित‍ि बन सकती है। हालांक‍ि ह‍िरल इस पर‍ि‍योजना को लेकर काफी उत्‍साह‍ित हैं।    

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