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बीएचयू में फुल टाइम से पार्ट टाइम PhD कन्वर्जन नियमों में बड़ा बदलाव, अब दो साल की रेजीडेंसी अनिवार्य

Published: Thu, 17 Sep 2026 08:23 PM (IST)

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में फुल टाइम पीएचडी को पार्ट-टाइम में बदलने के नियमों में बदलाव किया गया है, जिसमें अब ...और पढ़ें

बीएचयू में फुल टाइम से पार्ट टाइम पीएचडी कन्वर्जन नियमों में हुआ बदलाव।

बीएचयू में फुल टाइम से पार्ट टाइम पीएचडी कन्वर्जन नियमों में हुआ बदलाव।

HighLights

  1. फुल टाइम से पार्ट टाइम पीएचडी में कन्वर्जन के नियम बदले।

  2. दो साल की निरंतर रेजिडेंसी और स्थायी सरकारी नौकरी अनिवार्य।

  3. अकादमिक परिषद की बैठक में अंतिम निर्णय होगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में फुल टाइम पीएचडी शोधार्थियों को पार्ट-टाइम में बदलने के नियमों और पात्रता शर्तों को लेकर चल रही दुविधा शीघ्र दूर होगी। फुल-टाइम से पार्ट-टाइम पीएचडी में कन्वर्जन के लिए दो साल की निरंतर रेजिडेंसी और सरकारी या पीएसयू संस्थानों में फुल-टाइम नौकरी की शर्तें अनिवार्य की गई हैं।

कई ऐसे शोधार्थी हैं, जिन्होंने दो साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले विश्वविद्यालय से अनुमोदित अस्थायी अवकाश लिया था। अब वे शेष बची हुई रेजिडेंसी अवधि पूरी कर पार्ट-टाइम में कन्वर्जन कराना चाहते हैं। इस बात पर विचार किया जा रहा है कि ऐसे छात्रों को पुनः शामिल होकर अपनी अनिवार्य रेजिडेंसी का शेष समय पूरा करने की अनुमति दी जाए अथवा नहीं।

दूसरा अहम मुद्दा सरकारी संस्थानों में संविदा पर नौकरी पाने वाले शोधार्थियों से जुड़ा है। नियम के अनुसार केवल स्थायी प्रकृति की पूर्णकालिक नौकरी वाले ही पात्र हैं, लेकिन कुछ संविदा कर्मियों ने भी आवेदन किया है।

अब इस पर विचार हो रहा है कि क्या केवल स्थायी रूप से नियुक्त शोधार्थियों को ही इसकी अनुमति दी जाए। पार्ट-टाइम पीएचडी में कन्वर्जन के लिए 17 हजार रुपये का एकमुश्त गैर-वापसी योग्य शुल्क निर्धारित किया गया है।

पार्ट-टाइम शोधार्थियों को हर साल कम से कम 30 दिनों तक कैंपस में अपनी शारीरिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इस कार्यक्रम की न्यूनतम अवधि चार वर्ष और अधिकतम छह वर्ष तय की गई है।

अगर शोधार्थी निर्धारित रोजगार की स्थिति बनाए रखने में असफल रहता है और दो लगातार सत्रों में असंतोषजनक प्रगति रिपोर्ट देता है या शुल्क जमा नहीं करता है, तो उसका पार्ट-टाइम स्टेटस स्वतः रद कर दिया जाएगा।

शुक्रवार को अकादमिक परिषद की बैठक में प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगने के बाद उन तमाम शोधार्थियों की स्थिति साफ होगी, जो लंबे समय से अपने कन्वर्जन आदेश का इंतजार कर रहे हैं।

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