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BHU अस्पताल में बनेगा पूर्वांचल की पहली पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी यूनिट, बच्चों को मिलेगी बड़ी राहत

Published: Wed, 12 Aug 2026 02:22 PM (IST)

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल में पूर्वांचल की पहली पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी यूनिट स्थापित की जा रही है, जिससे ...और पढ़ें

सर सुंदरलाल अस्पताल ओपीडी। जागरण

सर सुंदरलाल अस्पताल ओपीडी। जागरण

HighLights

  1. पूर्वांचल की पहली पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी यूनिट बीएचयू में।

  2. बच्चों के हृदय रोगों का इलाज अब वाराणसी में संभव।

  3. जननी सुरक्षा योजना में 90% से अधिक माताओं को लाभ।

संग्राम सिंह, वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल में दिल की बीमारियों से जूझ रहे नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अस्पताल के सुपर स्पेशलिटी भवन के पांचवें फ्लोर पर पूर्वांचल की पहली पीडियाट्रिक कार्डियोलाजी यूनिट स्थापित की जा रही है। छह से आठ बेड वाली इस विशेष यूनिट के शुरू होने से अब हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

प्रस्ताव को प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद जगह चिह्नित कर ली गई है और मानक के अनुसार निर्माण एजेंसी तय करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस परियोजना की कमान विशेषज्ञ चिकित्सक डा. प्रतिभा राय को सौंपी गई है। आगामी चार से पांच महीनों में यह यूनिट पूर्ण रूप से क्रियाशील हो जाएगी, जिसमें बच्चों के लिए विशेष आइसीयू और वेंटिलेटर समेत अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध रहेंगी।

इमरजेंसी सेवाओं का विस्तार, सोमवार को मिलेंगे अतिरिक्त स्ट्रेचर
अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए इमरजेंसी सेवाओं में व्यापक सुधार किया है। आपातकालीन विभाग में डाक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की संख्या बढ़ा दी गई है। सोमवार को मरीजों की अत्यधिक संख्या को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त स्ट्रेचर की व्यवस्था की गई है, जिससे तीमारदारों को किसी तरह की असुविधा न हो।

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जननी सुरक्षा योजना में बीएचयू की छलांग, 90 प्रतिशत माताओं को मिला लाभ
सर सुंदरलाल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत ने बताया कि जननी सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन में अस्पताल ने अभूतपूर्व प्रगति की है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में अब 90 प्रतिशत से अधिक पात्र लाभार्थियों को योजना से जोड़ा जा चुका है। लाभार्थियों के बैंक खाते समय पर लिंक होने से सहायता राशि के भुगतान में तेजी आई है। पिछले चार माह में अस्पताल में लगभग 1,500 प्रसव कराए गए हैं। वर्तमान में औसतन 12 से 14 डिलीवरी प्रतिदिन दर्ज की जा रही हैं।