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गायों में बांझपन खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता, वैक्सीन बनाने का रास्ता साफ; पशुपालकों को होगा फायदा

Published: Wed, 14 Oct 2026 03:35 PM (IST)

बीएचयू के शोधकर्ताओं ने गायों में बांझपन के मुख्य कारण गर्भाशय संक्रमण फैलाने वाले एस्चेरिचियाकोलाई जीवाणु के एफआईएमएच जीन के अंश की सफल क्लोनिंग की है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. गायों में बांझपन रोकने को वैक्सीन बनाने का रास्ता साफ।

  2. एस्चेरिचियाकोलाई जीवाणु के एफआईएमएच जीन की क्लोनिंग हुई।

  3. भविष्य में सटीक डायग्नोस्टिक किट और टीका बनेगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। बीएचयू के शोधकर्ताओं ने पशुधन स्वास्थ्य और डेरी उद्योग को नई दिशा देने वाली महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सफलता हासिल की है। शोध टीम ने मवेशियों (विशेषकर गायों) में होने वाले गर्भाशय संक्रमण के मुख्य कारक एस्चेरिचियाकोलाई जीवाणु के एफआईएमएच जीन के इम्यूनोडामिनेंट अंश की सफल क्लोनिंग और संवर्धन किया है।

भविष्य में पशुओं में बांझपन की रोकथाम के लिए सटीक डायग्नोस्टिक किट और प्रभावी टीका बनाने का रास्ता साफ हो गया है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय पत्रिका प्रोसीडिंग्स आफ द इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ है।

पशुओं में गर्भाशय का संक्रमण बांझपन की सबसे बड़ी वजहों में से एक है, जिससे पशुपालकों और डेरी उद्योग को हर साल करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। गर्भाशय में संक्रमण फैलाने के लिए मुख्य रूप से एस्चेरिचियाकोलाई जीवाणु जिम्मेदार होता है, जिसकी मारक क्षमता एफआईएमएच नामक प्रोटीन पर टिकी होती है।

नौ शोधकर्ताओं की टीम ने की खोज

डॉ. बालमुरुगन बी. के नेतृत्व में नौ शोधकर्ताओं की टीम ने संक्रमित गायों के नमूनों से इस जीवाणु को अलग किया। इसके बाद जीवाणु के डीएनए से एफआईएमएच जीन के 300 बीपी वाले उस हिस्से को खोज निकाला, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सबसे तेजी से सक्रिय करता है।

शोधकर्ताओं ने जीन के इस हिस्से को प्लेट-51 प्लास्मिड वेक्टर के जरिए एस्चेरिचियाकोलाई डीएच-5 कोशिकाओं में क्लोन किया। प्रयोगशाला में प्रोटींस के विश्लेषण में 10.8 केडीए का एक स्पष्ट बैंड मिला, जिसने एफआईएमएच प्रोटीन के सफल संवर्धन की पुष्टि कर दी।

शोधकर्ताओं का मानना है कि जीन के इस खास हिस्से की क्लोनिंग से अब ऐसी डायग्नोस्टिक किट बनाई जा सकेगी जिससे गायों में संक्रमण का शुरुआती दौर में ही पता चलेगा।

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