मऊ, जेएनएन। सदर विधायक मुख्तार अंसारी को पंजाब के मोहाली कोर्ट में पेशी के लिए ले जाने वाले एंबुलेंस प्रकरण में भाजपा गोरक्ष प्रांत की महिला मोर्चा की महामंत्री तथा श्याम संजीवनी अस्पताल की संचालिका डा. अलका राय की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करने के बाद शनिवार की देर रात बाराबंकी पुलिस जिला मुख्यालय पर पहुंची है। टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर व मुकदमें के विवेचक महेंद्र सिंह कर रहे हैं। बाराबंकी से आई टीम में शामिल छह लोगों में दो महिल पुलिस कर्मी भी है।

इससे कयास लगाया जा रहा है कि बारांबकी पुलिस पूरी तैयारी से ही जिले में पहुंची है। दूसरी तरफ मुख्तार अंसारी के खिलाफ तहरीर दी डा. अलका राय की रिपोर्ट 24 घंटे बाद भी दर्ज नहीं की गई। उधर मुख्तार अंसारी व सदर विधायक से मधुर रिश्ते की भी जनपद में जबरदस्त चर्चा है। हर चट्टी चौराहे पर दबी जुबान यह बातें देर शाम तक होती रही। 

बीते दिनों मुख्तार अंसारी को जिस बुलेट प्रुफ एंबुलेंस से मोहाली कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया गया? था, उसका रजिस्ट्रेशन श्याम संजीवनी अस्पताल बाराबंकी के नाम से फर्जी रूप से दर्ज था। जांच पड़ताल में श्याम संजीवनी हास्पिटल की संचालिका डा. अलका राय का नाम प्रकाश में आया। इस आधार पर बाराबंकी में एक अप्रैल को ही एआरटीओ द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया? था। इसके बाद डा. अलका राय ने शुक्रवार को बलिया मोड़ स्थित अपने अस्पताल पर प्रेसवार्ता कर अपनी सफाई दी थीं कि वर्ष 2013 में विधायक निधि से अस्पताल को एंबुलेंस देने के लिए कुछ कागजों पर अस्पताल के डायरेक्टर व उनके भाई से विधायक मुख्तार अंसारी के प्रतिनिधि मुजाहिद ने दस्तखत कराए थे और मात्र एक चेक पंद्रह या बीस हजार का लिया था।वर्ष 2015 में एंबुलेंस को हस्तांतरण करने के लिए भी हस्ताक्षर करवाया गया था। एंबुलेंस के पंजीयन संख्या यूपी-41 एटी-7171 के बारे में सिरे से उन्होंने नकार दिया था। 

अब यह सवाल उठता है कि अगर एंबुलेंस उनके अस्पताल के नाम पर रजिस्टर्ड हैं तो उन्होंने हस्तांतरण कराने के बाद उसकी खोजबीन क्यों नहीं की। उनके दस्तावेज के आधार पर एंंबुलेंस पंजाब प्रांत तक कैसे चली गई। यह सवाल यक्ष प्रश्न बना हुआ है। फिलहाल अलका राय मुख्तार अंसारी से किसी भी रिश्ते से इंकार कर रही है। उनका कहना है कि वह सदर विधायक थे। एक जनप्रतिनिधि होने की वजह से वह उनसे मिलती थीं। फिलहाल मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद उनके अस्पताल के लोग मेत इनके शुभेच्छु भी भौचक हैं। शनिवार को दिन भर यह चर्चा होती रही कि बाराबंकी पुलिस जनपद में पहुंच चुकी है। इस पर एसपी, सीओ व कोतवाल के मोबाइल फोन फोन घनघनाते रहे। यही नहीं चट्टी चौराहों पर यह भी चर्चा होती रही कि अब अलका राय की मुश्किलें काफी बढ़ सकती है। चर्चा के बीच यह भी बात सामने आ रही थी कि सदर विधायक के आगरा व गाजीपुर जेल में रहने के दौरान वह मुख्तार अंसारी से मिलने भी गईं थी। कुछ लोग इस चर्चा को पक्का भी मान रहे थे लेकिन कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था। इन सबके बीच देर रात बाराबंकी पुलिस जिले में पहुंची और सुबह तक अलका राय से पूछताछ की बात अफसरों ने स्वीकारी भी।

नेटवर्क के भरोसे बेताज बादशाह बना है मुख्तार अंसारी

सदर विधायक मुख्तार अंसारी ऐसे ही नहीं अपराध जगत का बेताज बादशाह बना है।  वह किसी भी घटना में भी सीधे तौर पर जुड़ा नहीं रहा। वह हर घटनाओं में अपने नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा। यही वजह रही कि उनके खिलाफ कोई भी मामला सीधे तौर पर सामने नहीं आया बल्कि वह आरोपित होता रहा। इसकी वजह से पुलिस भी उनसे सीधे तौर पर नहीं जुड़ पाई। इसी तरह का खेल एंबुलेंस प्रकरण में भी मुख्तार व उनके गुर्गों ने खेला है जिसमें अलका राय को बनाया गया है। 

सदर विधायक पर दर्ज हैं 46 संगीन अपराध 

सदर विधायक मुख्तार अंसारी पर जनपद सहित आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर व बनारसी में कुल 46 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। पहला मुकदमा मऊ कोतवाली में वर्ष 2004 में 147, 148, 149, 393, 507, 504, 506, 342 भादवि, 2005 में 147, 148, 149, 302, 435, 436, 153 भादवि, 2009 में 147, 148, 149, 307, 302, 325, 404, 120 बी, भादवि व 7 सीएलए एक्ट,  2010 में दक्षिण टोला थाने में गैंगेस्टर एक्ट, 302, 307, 7 सीएलए एक्ट 25 आम्र्स एक्ट, 2020 में 419, 420, 467, 471, व 30 आयुध अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा गाजीपुर में 21 संगीन मुकदमे, आजमगढ़ में दो, वाराणसी में सात, चंदौली में एक, सोनभद्र में एक, लखनऊ में तीन, आगरा में एक, नई दिल्ली में तीन व पंजाब में 386 व 506 भादवि के तहत मुकदमा दर्ज है। वर्ष 2005 में मुख्तार अंसारी जेल में बंद थे। इसी दौरान बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय को उनके 5 साथियों सहित सरेआम गोलीमार हत्या कर दी गई। 2008 में अंसारी को हत्या के एक मामले में एक गवाह धर्मेंद्र सिंह पर हमले का आरोपी बनाया गया था।2012 में महाराष्ट्र सरकार ने मुख्तार पर मकोका लगाया। उनके खिलाफ हत्या, अपहरण, फिरौती जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन तमाम मुकदमों में भी मुख्तार अंसारी ने अपने नेटवर्क का सहारा लिया है। 

Edited By: Abhishek Sharma