वाराणसी [कुमार अजय]। योगी बाबा की अपील के अदब व गोगोई सर की सलाह के लिहाज में अस्सी अड़ी की भिनसहरी बइठकी में सिले हुए होठों से चाय की चुस्कियां लेने के लिए मजबूर अड़ीबाज दोपहर में आए अयोध्या मामले के फैसले की सूचनाओं से लैस जब शाम को अड़ी पर जुटे तो लगा मानो पेट में घुमड़ता सारा अफारा बुलंद डकार के रूप में डिस्चार्ज हो गया हो। 

हर तरफ बधाइयां हर होंठ पर जयरम्मी। फिर चाहे रामजी की डिगरी की खबर सुन कर हार्निया के आपरेशन के बाद तीन दिनों से रेस्ट को बेड पर ही तिलांजलि देकर कांखते-कूंखते अड़ी पर भागे चले आए बाबू रामजी राय की पुरशोर बहस की खम्मा-खम्मी। राय साहब ने आते ही कंहरती हुई सी एक ललकार लगाई और अड़ी के हर कोने से जय श्रीराम की एक स्वर ध्वनियां कर्णकुहरों से आ टकराईं।

शाम के झुटपुटे में अपनी स्कूटी से नमूदार हुए डा. आरपी सिंह भारत कला भवन वाले और बिना किसी भूमिका के रामनामी फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया हर किसी को माउथ पोस्ट कर दी- पंचों अइसन फैसला आयल हौ कि न एहर फंसी, न ओहर बिगड़ी रामै के भरोसे भयल रामजी क डिगरी। इस बीच अड़ी के पितृपुरुष बाऊ हर किसी को यह विश्वास दिलाने में लगे रहे कि उनके सूत्रों ने रात में ही उन्हें फैसले का सार तत्व बता दिया था। अलबत्ता किसी को भी भनक न लगने देने का पेंच फंसा दिया था। अड़ीबाज पहले तो बाऊ की कोरी गप पर भरोसा करने को तैयार न थे पर पुलिस विभाग से अवकाश लेकर इन दिनों तबीयत से अड़ीलाभ कर रहे शुक्ला जी ने बीच की राह निकाली और फुलबोर्ड कॉफी पिलाने की शर्त पर उनकी गपोड़ पर भी मुहर लगा देने की हामी भर डाली। 

अब बारी थी बड़ी देर से चाय की खाली गिलास को घूरते हुए चिंतनरत दार्शनिक प्रो. देवव्रत चौबे की। स्वभाव के मुताबिक गुरुवर गंभीर ही बोले- जिन केहू के जितावा, जिन केहू के हरावा इहै मौका हव सबके गले लगा के रामलला अउर हिंद क जयकारा लगावा। अड़ी की महिमा से चमत्कृत दर्शन शास्त्र के विद्वान व गोवा से आए खास मेहमान प्रो. गोरखनाथ मिश्र ने भी फैसले को ऐतिहासिक करार दिया। बड़ी शिद्दत से देश के मुस्लिम बंधुओं के सब्र व सद्भाव को गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल की संज्ञा दी। 

भाई चंद्र प्रकाश जैन अलबत्ता आज अपने स्वभाव के विपरीत थोड़ा पोलेटिकल हुए जा रहे थे- अब केहू पूछे राम मंदिर बनावे क तारीख त हम पत्रा देख के बताईं। अउर सालभर के भितरे ओन्हें राम मंदिर के परिक्रमा कराईं। उधर, समीर माथुर व वैद्य प्रवर सुजीत शेखर मिश्र तो अड़ी के विसर्जन के बाद भी देर रात तक उधरे मंडराते रहे- ...हमरे त भइले लला राम हो केसरिया रंग क... की तान में बड़ा पुराना सोहर गाते रहे। अधिवक्ता सूर्य कुमार गोंड़ का कहना था- भारत क लोकतंत्र सबसे बब्बर अउर भारतीयन के मेल मिलाप क धागा अब्बो सबसे जब्बर हव, ई बात एक बार फिर फरिया गयल। चमकत हव फिन भारत माता क मुखमंडल अउर बैरियन क मुंह करियाय गयल।

अस्सी अड़ी के अलावा सोनारपुरा पर पल्लू की अड़ी हो या भदैनी वाले कल्लू की। ठीहां हो पियरी वाले मुरारी का या ठांव हो औसानगंज वाले काली का। हर ठहर राम की अडिग गद्दी तथा अयोध्या में बनने वाले मंदिर-मस्जिद की पवित्र-पाकीजा चौहद्दी की ही चर्चा। इस यकीन के साथ कि तमाम कोशिशों के बाद भी- मिल्लत क ताना-बाना कसल रहे, मुद्दइन के लगत हव त लगत रहे मर्चा।

Posted By: Abhishek Sharma

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