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अयोध्या में मंदिर का अवशेष तलाश करने वाले पुरातत्वविद ने बीएचयू से ग्रहण की शिक्षा, पद्मश्री से हुए सम्मानित

By Devendra Nath SinghEdited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 26 Jan 2026 01:23 PM (IST)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. बीआर मणि को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। उन्होंने अयोध्या विवाद ...और पढ़ें

अयोध्या मंदिर अवशेष खोजने वाले पुरातत्वविद डॉ बीआर मणि को पद्मश्री सम्मान।

अयोध्या मंदिर अवशेष खोजने वाले पुरातत्वविद डॉ बीआर मणि को पद्मश्री सम्मान।

HighLights

  1. डॉ. बीआर मणि को अयोध्या योगदान के लिए पद्मश्री मिला।

  2. उन्होंने अयोध्या में मंदिर के महत्वपूर्ण अवशेष खोजे थे।

  3. डॉ. मणि ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की।

जागरण संवाददाता, वाराणसी: अयोध्या विवाद को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक डा. बीआर मणि को सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया है। उन्होंने इस पर प्रसन्नता व्यक्त की। उनका कहना है कि सरकार ने उनको कार्यों को इस योग्य माना और सम्मान प्रदान किया।

डा. बीआर मणि का का जन्म वर्ष 1955 में गोरखपुर के बस्ती में हुआ लेकिन जीवन का महत्वपूर्ण वक्त उन्होंने वाराणसी में बिताया। यहीं से शिक्षा प्राप्त की और शिक्षण किया और यहीं सारनाथ के सारंगनाथ कालोनी में अपना आवास भी बनाया है। डा. बीआर मणि ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक के बाद यहीं से वर्ष 1976 में प्राचीन इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और 1980 में बीएचयू से ही 'कुषाण युग में जीवन' विषय पर पीएचडी पूरी की।

इसके बाद तीन वर्ष बीएचयू के आर्कियोलाजी डिपार्टमेंट तीन वर्षों तक पढ़ाया। साथ ही केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान में शिक्षा दी। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा उनका चयन उप अधीक्षक पुरातत्वविद् के पद के लिए वर्ष1984 में हुआ था। वर्ष 2015 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अतिरिक्त महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद राष्ट्रीय संग्रहालय में महानिदेशक के पद रहे, नोयडा स्थित हेरिटेज इंस्टीट्यूट आफ हेरिटेज में वाइस चांसलर भी रहे हैं। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व परिषद के वाइस चेयरमैन के रूप में कार्य कर रहे हैं।

डा. बीआर मणि की बचपन से ही रुचि पुरातत्व में थी। उनके घर के पास एक पुरातत्व स्थल था, जहां अपने पिता और दादी के साथ जाया करते थे। दस साल की उम्र तक ब्राह्मी लिपि की अच्छी जानकारी हासिल कर ली थी। नाना भी एक अनुभवी पुरातत्वविद थे जिन्होंने हालैंड से डिग्री प्राप्त की थी।

डा. बीआर मणि ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गोवा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में अन्वेषणों के दौरान बड़ी संख्या में पुरातात्विक स्थलों की खोज की है। देश में 14 से अधिक उत्खनन परियोजनाओं का निर्देशन किया है। इनमें से कुछ लाल कोट (दिल्ली), सलीमगढ़ (दिल्ली), मोहम्मद नगर और हरनोल (हरियाणा), सिसवानिया, संकिसा, अयोध्या, लाठिया (उत्तर प्रदेश) और कनीसपुर और अंबारन (जम्मू-कश्मीर) हैं। उनके नाम से छह पुस्तकें और 200 शोध पत्र प्रकाशित हैं।

अयोध्या में तलाश किया मंदिर का अवशेष

डा. बीआर मणि ने अयोध्या में मंदिर का अवशेष तलाश किया था। अदालत के आदेश पर वर्ष 2003 में उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की टीम के साथ अयोध्या के विवादित स्थल पर उत्खनन का नेतृत्व किया था। उनकी टीम ने जमीन के नीचे एक पुराने, विशाल ढांचे के अवशेषों की खोज की, जिसे मंदिर के प्रमाण के रूप में पेश किया गया। ये निष्कर्ष 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में अहम भूमिका निभाते हैं।

खोदाई में 90 ट्रेंच में मलबे की परतों की जांच की गई। एक तरफ लोग मानते थे कि अयोध्या में 700 ईसा पूर्व से पहले कुछ भी नहीं था जबकि खोदाई में 1680 ईसा पूर्व तक के साक्ष्य मिले। खोदाई में 84 स्तंभों पर आधारित एक मंदिर जैसे ढांचे का प्रमाण मिला, जिसमें 'मकर प्रणाली' (पानी निकालने का रास्ता) जैसी मंदिर की संरचनाएं शामिल थीं। उन्होंने यह सिद्ध किया कि विवादित ढांचे के नीचे मौजूद पुरानी संरचनाएं किसी मंदिर की थीं, न कि किसी मस्जिद की। उनके द्वारा एकत्र किए गए साक्ष्यों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों में राम मंदिर के दावे को पुष्ट करने वाला एक मुख्य आधार माना गया।