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प्राचीन ज्ञान आधुनिक चुनौतियों का समाधान, मानवता के कल्याण में निहित है विकास : प्रीति अदाणी

By Vns Arun Mishra Edited By: Abhishek sharma
Published: Mon, 02 Nov 2026 11:04 AM (IST)

प्रीति अदाणी ने वाराणसी में 'प्राचीन ज्ञान आधुनिक चुनौतियों का समाधान' संगोष्ठी में कहा कि काशी ज्ञान और दर्शन की ...और पढ़ें

HighLights

  1. काशी ज्ञान-दर्शन की भूमि, आधुनिक समस्याओं का हल।

  2. योग, मिलेट्स प्राचीन ज्ञान के आधुनिक उदाहरण।

  3. आत्मनिर्भरता, समाज सेवा ही वास्तविक विकास।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी केवल तीर्थ और आध्यात्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को जीवन का मार्ग दिखाने वाली ज्ञान और दर्शन की भूमि है। यहां की मंदिरों की घंटियों की गूंज, मां गंगा की शांति और आध्यात्मिक चेतना मनुष्य को अपने भीतर झांकने का अवसर देती है।

प्राचीन ज्ञान की यही शक्ति आधुनिक दुनिया की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकती है। यह बातें अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन प्रीति अदाणी ने सोमवार को ताज गंगा में आयोजित विश्व संगोष्ठी अन्सिएंट विजडम फार माडर्न चैलेंजस में कहीं। दो से चार नवंबर तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों, दार्शनिकों और आध्यात्मिक चिंतकों ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की आधुनिक समय में प्रासंगिकता पर विमर्श किया।

प्रीति अदाणी ने अपने संबोधन में कहा कि वाराणसी से बेहतर इस महत्वपूर्ण वैश्विक संवाद के आयोजन के लिए कोई दूसरी जगह नहीं हो सकती। यह वह भूमि है जहां मानवता के सबसे पुराने प्रश्न आज भी प्रासंगिक हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा ने सदियों से संतों और आध्यात्मिक गुरुओं को आकर्षित किया है। भगवान बुद्ध और गुरु नानक ने भी इस धरती से मानवता को संदेश दिया। जैन तीर्थंकरों की परंपरा भी इस भूमि से जुड़ी रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी को अपनी संसदीय कर्मभूमि चुना। इसके बाद यह नगरी वैश्विक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण केंद्र बनी है। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने यहां की आध्यात्मिक परंपरा का अनुभव किया तो फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गंगा में नौका विहार कर काशी की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा।

योग और मिलेट्स में छिपा है आधुनिक समस्याओं का समाधान

प्रीति अदाणी ने कहा कि भारतीय प्राचीन ज्ञान की प्रासंगिकता के उदाहरण हमारे दैनिक जीवन में मौजूद हैं। योग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पूरी दुनिया ने योग के महत्व को स्वीकार किया है। योग मन और शरीर के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। इसी तरह कभी भारतीय पारंपरिक भोजन का हिस्सा रहे मिलेट्स यानी मोटे अनाज आज पोषण, जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलता और खाद्य सुरक्षा की वैश्विक चर्चाओं के केंद्र में हैं। इससे स्पष्ट है कि प्राचीन ज्ञान केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की समस्याओं का समाधान भी है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग सभ्यताओं और दर्शन में मानव कल्याण की एक साझा सोच दिखाई देती है। भगवान बुद्ध ने दुख के कारणों और उससे मुक्ति का मार्ग बताया। अरस्तू ने मानव जीवन की समृद्धि और उत्कर्ष पर विचार किया तो कन्फ्यूशियस ने सामाजिक संबंधों और नैतिक दायित्वों को महत्व दिया। भारतीय दर्शन का वसुधैव कुटुंबकम का विचार पूरी दुनिया को एक परिवार मानने की प्रेरणा देता है। इन सभी विचारों का मूल उद्देश्य मानव पीड़ा को कम करना और बेहतर समाज का निर्माण करना है।

सेवा ही सबसे बड़ा धर्म, लोगों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी
अपने तीन दशक से अधिक के सामुदायिक विकास के अनुभव साझा करते हुए प्रीति अदाणी ने कहा कि विकास का वास्तविक आकलन आंकड़ों और बड़ी इमारतों से नहीं, बल्कि आम आदमी के जीवन में आए बदलाव से होना चाहिए। अस्पताल बनाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी है कि वहां पहुंचने वाले मरीज को उम्मीद मिले। विद्यालय खोलना उपलब्धि है, लेकिन असली सफलता तब है जब पहली पीढ़ी का विद्यार्थी कक्षा में बैठकर अपने बेहतर भविष्य का सपना देख सके।

उन्होंने कहा कि अदाणी फाउंडेशन के माध्यम से सात हजार से अधिक गांवों में काम करते हुए यह समझ विकसित हुई है कि सेवा का अर्थ दूर बैठकर सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें अपना भविष्य गढ़ने के लिए सक्षम बनाना है। परिवार और समाज की वास्तविक प्रगति तभी है जब लोग बाहरी सहायता पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनें।

धर्म और जिम्मेदारी से तय होगा सतत विकास का रास्ता
प्रीति अदाणी ने बताया कि उनके पति गौतम अदाणी के 60वें जन्मदिन पर परिवार ने उपहार के रूप में समाजसेवा के लिए छह मिलियन डालर से अधिक की राशि समर्पित करने का संकल्प लिया। यह केवल आर्थिक योगदान नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि किसी भी पहल का महत्व उसके घोषित आकार से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले अवसरों, लोगों की गरिमा और स्थायी संस्थानों के निर्माण से तय होता है।

उन्होंने कहा कि भारत आज भी गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। अदाणी समूह ने बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश के माध्यम से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में योगदान देने का संकल्प लिया है। समूह ने ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े बुनियादी ढांचे में 100 अरब डालर से अधिक निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। गुजरात के खावड़ा में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता वाला दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सतत विकास केवल वार्षिक रिपोर्ट का एक अध्याय नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे व्यवहार में उतारना जरूरी है। भारतीय दर्शन का धर्म सिद्धांत आधुनिक उद्यमों को भी यह याद दिलाता है कि अधिकारों और प्रगति से पहले कर्तव्यों तथा समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारियों को समझना होगा।

धन विरासत में मिलता है, मूल्य अगली पीढ़ी को देने पड़ते हैं
प्रीति अदाणी ने कहा कि तकनीक हमें यह बताती है कि हम क्या कर सकते हैं, जबकि प्राचीन ज्ञान यह सिखाता है कि मनुष्य को क्या करना चाहिए। आज एल्गोरिदम और आधुनिक तकनीक जटिल समस्याओं के समाधान में मदद कर रहे हैं, लेकिन संघर्ष, असमानता, पर्यावरणीय क्षरण और जीवन के उद्देश्य की तलाश जैसे सवाल अब भी हमारे सामने हैं।

उन्होंने कहा कि विरासत केवल वह नहीं है जो हम अगली पीढ़ी के लिए छोड़ जाते हैं, बल्कि वह भी है जो हम अपने जीवन में बनकर दिखाते हैं। धन विरासत में मिल सकता है, लेकिन मूल्य अगली पीढ़ी को देने पड़ते हैं। जीवन का वास्तविक उद्देश्य विनम्रता के साथ जिम्मेदारी निभाना और समाज को कुछ लौटाना है। अंत में उन्होंने दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में स्वास्थ्य, करुणा और शांति का प्रकाश लेकर आए। उन्होंने हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।

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