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वाराणसी, [अनुराग सिंह]।  बदलते समय के साथ दुनिया की तमाम संस्कृतियों ने जहां अपनी ज्ञान परंपरा को अपडेट किया, वहीं दुनिया की सबसे प्राचीन वेद परंपरा शिथिलता का शिकार हो गई। बावजूद इसके प्राच्य विद्या आधुनिक ज्ञान को कड़ी चुनौती पेश कर रहा है।संस्कृत विद्या-धर्म विज्ञान संकाय, बीएचयू स्थित ज्योतिष विभाग के प्रो. गिरिजा शंकर शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष विभाग में पारिवारिक-आर्थिक समस्याओं का समाधान मिलता है। कई बार असाध्य रोग से पीडि़त मरीज पर औषधि, दवा आदि का भी असर नहीं होता। यह स्थिति ग्रहों के कारण होती है। ग्रह शांति के बाद अमूमन इनसे मुक्ति मिल जाती है। समस्याओं के समाधान के लिए तंत्र-मंत्र, व्रत-उपवास और अनुष्ठान संग ग्रहों को शांत कराया जाता है। यहां इसकी ओपीडी चलती है। 

क्या है ज्योतिष 

 प्राचीन काल में ग्रह, नक्षत्र व अन्य खगोलीय पिंडों का अध्ययन करने के विषय को ज्योतिष कहा गया। यह वेदों जितना ही पुराना है। भारतीय आचार्यों द्वारा रचित ज्योतिष की पांडुलिपियों की संख्या एक लाख से अधिक है।

बनाई जाती है कुंडली 

प्रो. शास्त्री ने बताया कि कोई भी मरीज आता है तो परामर्श केंद्र से कुंडली दी जाती है। यदि किसी की कुंडली नहीं है तो उसके जन्म तिथि, समय, स्थान आदि के आधार पर कुंडली तैयार कर दी जाती है। उसका भी अभाव है तो किसी देवता का नाम, कुंड व कु का नाम पूछा जाता है, इसी के आधार पर तत्काल प्रश्न कुंडली बनाई जाती है। 

लोगों की समस्याएं

 यहां आने वाले लोग अधिकतर नौकरी, विवाह, धन वृद्धि व उसके ठहराव को लेकर परेशान रहते हैं। रोगियों में जो असाध्य रोग से पीडि़त होते हैं उनको लेकर परिवार के लोग अधिक आते हैं। जिनको लगता है कि वे ठीक नहीं हो सकते। इसके अतिरिक्त युवा भी आते हैं। उनकी समस्या होती है कि उन्हें किस क्षेत्र में जाना चाहिए की सफलता मिल सके। 

उपचार या निदान के तीन मार्ग 

1- दैव व्यपाश्रय : जब आदमी हर जगह से निराश हो जाता है और ठिक नहीं होता है तो दैव शक्ति पर ही निर्भर रहता है। इसमें मंत्र, तंत्र, व्रत, उपवास, प्रायश्चित, अनुष्ठान आदि कराया जाता है।

2- युक्ति व्यपाश्रय : डाक्टर या वैद्य दवा देते हैं लेकिन यहां औषधि, रत्न, भष्म आदि के माध्यम से निदान बताया जाता है।

  

3- सत्वावजय व्यपाश्रय : कई बार लोगों में मानसिक अशांति अचानक उत्पन्न हो जाती है। कोई सामान्य व्यक्ति जो स्वस्थ हो लेकिन अचानक उसे किसी के घायल, बीमार, निधन आदि की जानकारी मिलती है तो वह अशांत हो जाता है। उसे तत्काल मानसिक झटका लगता है वे अपने को भूल जाते हैं। कई तो बर्दाश्त कर लेते हैं तो कुछ विक्षिप्त, अस्वस्थ हो जाते हैं। ये प्राय: अमावष्या व पूर्णिमा को होती है। लोग अधिक उन्माद करते हैं। 

ज्योतिष शास्त्र करता है उपाय 

लोगों की समस्याओं को रोकने के लिए ज्योतिष शास्त्र उपाय करता है। मंत्र जाप व यज्ञ ही सबसे बड़ा उपाय है। यज्ञ कराना जैसे- अतिरुद्र, महारुद्र, चंडी पाठ, महामृत्युंजय मंत्र, संजीवनी मंत्र, चंद्र मंत्र अथवा सभी ग्रहों की शांति के लिए यज्ञ किया जाता है। जिस ग्रह का दोष अधिक रहता है उसके लिए विशेष यज्ञ कराया जाता है। मंत्र, यज्ञ कराने से पीडि़त को शांति मिलती है।

Posted By: Abhishek Sharma

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