वाराणसी में अब एआई से गांवों तक पहुंचेगी आधुनिक जांच, कैंसर की शुरुआती पहचान में भी मिलेगी मदद
वाराणसी में आईआईटी बीएचयू और एसटीपीआई द्वारा आयोजित कॉन्क्लेव में एआई को स्वास्थ्य सेवा और कैंसर की शुरुआती पहचान में महत्वपूर्ण बताया गया।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
एआई से गांवों में एमआरआई, सीटी स्कैन की सुविधा।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान में सहायक।
शोध को मरीजों के काम आने वाले उत्पादों में बदलना।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। गांवों के मरीजों को एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए बड़े शहरों की दौड़ न लगानी पड़े और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती चरण में पहचान हो सके। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इन चुनौतियों के समाधान में मददगार बन सकती है।
शनिवार को आईआईटी बीएचयू में आयोजित ‘एआइफार हेल्थकेयर एंड असिस्टिवटेक्नोलॉजीज’ कान्क्लेव में विशेषज्ञों ने तकनीकी शोध को मरीजों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया।
आयोजन आइआइटी बीएचयू के नवोन्मेष, अभिपोषण एवं उद्यमिता केंद्र (सीआइआइई) और साफ्टवेयर टेक्नोलाजीपार्क्स आफ इंडिया (एसटीपीआइ) ने संयुक्त रूप से किया।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि एआइ केवल कंप्यूटर विज्ञान या गणित तक सीमित नहीं, बल्कि सामान्य प्रयोजन की तकनीक है। हर विषय के विद्यार्थियों को इसे समझना चाहिए। चिकित्सा में इसके परिणामों की सटीकता परखने के लिए विशेषज्ञों का ज्ञान जरूरी है। एआइ चिकित्सकों के नैदानिक निर्णय का विकल्प नहीं हो सकता।
बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान की सर्जिकल आंकोलाजिस्ट प्रो. मल्लिका तिवारी ने बताया कि विदेशों में पैंक्रियाटिक, ब्रेस्ट और कोलन कैंसर की शुरुआती पहचान में एआइ आधारित उपकरण इस्तेमाल हो रहे हैं।
उन्होंने वाराणसी में नमो शक्ति अभियान के तहत थर्मल इमेजिंग से एक दिन में पांच हजार महिलाओं की स्क्रीनिंग का उल्लेख किया। एक्स-रे स्क्रीनिंग, ईईजी विश्लेषण, रिमोट आइसीयू मानिटरिंग और सर्जरी में त्रिआयामी माडल भी इसके उपयोग के उदाहरण हैं।
शोध को मरीजों के काम आने वाले उत्पादों में बदलने पर बल
एसटीपीआी के महानिदेशक डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि शोध को व्यावसायिक रूप से सफल उत्पादों में बदलने के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र जरूरी है। उत्तर प्रदेश और बिहार में भी स्टार्टअप को प्रोत्साहित करना होगा।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने शिक्षण संस्थानों, चिकित्सकों, उद्योग और स्टार्टअप के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर बल दिया।
सीआईआईई के समन्वयक प्रो. एमके मेश्राम के संयोजन में हुई पैनल चर्चाओं में शुरुआती जांच, रोगों के पूर्वानुमान, सहायक उपकरणों और अनुकूल संचार प्रणालियों में एआई के इस्तेमाल पर विमर्श हुआ।
विशेषज्ञों ने दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतों, मरीजों की गोपनीयता तथा एआई के जिम्मेदार प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक तभी सफल होगी, जब वह सुरक्षित, किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा के रूप में आम लोगों तक पहुंचे।
