सोनभद्र, जेएनएन। खाद्य पदार्थो में सिंथेटिक रंग का प्रयोग हमारे स्वास्थ्य के लिए सबसे घातक साबित हो रहा है। हरे सिंथेटिक रंग वाले खाद्य पदार्थ से कैंसर का खतरा है वहीं अल्युमिनियम वर्क लगी मिठाइयां खाने से याददाश्त जाने की संभावना अधिक हो जाती है। होली में मांग बढ़ने के साथ ही खाद्य पदार्थों में मिलावट बढ़ जाती है। जिसके खाने से मानव तरह-तरह की बीमारियों की गिरफ्त में आ जाता है। मिलावटी दूध और उससे निर्मित खाद्य पदार्थों के सेवन से पेट की विभिन्न बीमारियों से अतिरिक्त लीवर खराब होने का खतरा अधिक होता है।

वहीं मिठाइयों पर चांदी की वर्क के स्थान पर धड़ल्ले से अल्युमिनियम के वर्क का प्रयोग किया जाता है। इतना ही नहीं खाद्य कलर काफी महंगा होने और रंग हल्का होने के कारण दुकानदारों द्वारा सिंथेटिक कलर का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। जो मानव के स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। डाक्टरों ने कहा है कि सबसे अधिक खतरनाक हरा रंग है। इसमें मैला काइट ग्रीन तत्व पाया जाता है जो कैंसर का कारक होता है। सिंथेटिक हरे रंग से निर्मित नमकीन, पापड़, मिठाइयां आदि के सेवन से कैंसर की संभावना अधिक हो जाती है। त्योहारों पर जिला अभिहित अधिकारी की आेर से विभिन्न जगहों पर छापेमारी कर धड़पकड़ की कार्रवाई भी की जा रही है। लोगों को भी मिलावटी खाद्य पदार्थों से सर्तक रहने की जरूरत हैं।

ऐसे करें खाद्य पदार्थ में मिलावट की पहचान

दूध में यूरिया का परीक्षण : एक परखनली में पांच मिलीलीटर दूध में पैरा डाई मिथाइलएमिनबेंजाइल्डिहाइड का घोल डालकर हिलाने पर यदि पीला रंग (कैनरीयेलो) तुरंत स्पष्ट होता है तो यूरिया या नाइट्रोजिनस पदार्थ मिलाए जाने की पुष्टि होती है।

फार्मेलिन का परीक्षण : एक परखनली में पांच मिलीलीटर दूध में दो से पांच बूंद फ्लोरोग्लूसिनाल डालकर हिला लें। इसके बाद दो से पांच बूंद सोडियम हाईड्राक्साइड का घोल डालकर हिलाएं। यदि दूध का रंग गुलाबी हो जाता है तो दूध में फार्मलीन की मिलावट है।

डिटर्जेंट का परीक्षण : एक परखनली में पांच मिलीलीटर दूध में दो बूंद ब्रोमोक्रिसाल पर्पल का घोल डालकर हिलाने पर यदि दूध का रंग हल्का नीला हो जाता है तो दूध में डिटर्जेंट के मिलाए जाने की पुष्टि होती है।

सोडा परीक्षण : एक परखनली में पांच मिलीलीटर दूध में पांच मिलीलीटर एल्कोहल मिला लें। इसके पश्चात इस घोल में दो से पांच बूंद रोजेलिक एसिड के घोल को डालकर हिलायें। यदि स्पष्ट गुलाबी रंग 30 सेकेंड में आता है तो सोडा की पुष्टि होती है।

स्टार्च का परीक्षण : एक परखनली में पांच मिलीलीटर दूध उबाल कर एवं ठंडा कर उसमें पांच बूंद आयोडीन घोल डालकर हिलाएं यदि दूध का रंग नीला हो जाता है तो उसमें स्टार्च की मिलावट की पुष्टि होती है।

मिठाइयों की जांच : खोवा, पनीर एवं मिठाइयों का परीक्षण करने हेतु पांच ग्राम नमूना एक परखनली में लगभग पांच मिलीलीटर पानी के साथ हल्का गर्म करें। हिलाकर फिल्टर पेपर से छानकर विलयन को ठंडा करें। इस विलयन से दूध की भांति परीक्षण कर मिलावट की जांच की जा सकती है। होली पर्व पर नमकीन, चिप्स, पापड़, खोवा, पनीर आदि दुग्ध पदार्थों की मांग एकाएक बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाने के लिए कुछ दुकानदार मिलावटखोरी करने लगते हैं। मिलावटी व नकली खाद्य पदार्थों के निर्माण व बिक्री पर रोक के लिए शासन के निर्देश पर एक मार्च से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। यह 19 मार्च तक चलेगा। अब तक 44 नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। पर्व पर विभाग की विशेष सर्तकता है।

Posted By: Abhishek Sharma

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