वाराणसी , जेएनएन। मानव संसाधन विकास केंद्र (एकेडमी स्टाफ कालेज) के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय यूजीसी को प्रस्ताव भेजा है। यूजीसी ने सकारात्मक संकेत मिले हैं। ऐसे में प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है। स्वीकृति मिली तो यह संस्कृत विवि में देश का पहला केंद्र होगा। बीएचयू सहित देश के कई आधुनिक विश्वविद्यालयों में एकेडमी स्टॉफ कालेज हैं लेकिन देश के किसी संस्कृत विवि में अब तक इस तरह का केंद्र नहीं है।

संस्कृत के अध्यापकों को ओरिएंटेशन व रिफ्रेशर कोर्स आधुनिक विश्वविद्यालयों से करना होता है। संस्कृत विवि में सेंटर स्थापित होने पर उन्हें ओरिएंटेशन व रिफ्रेशर कोर्स के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने बताया कि विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा दिलाने के लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही नए सिरे से प्रयास किए जाएंगे।

दिसंबर में खत्म होगी ग्रेडिंग की वैधता

कहा कि नैक से पांच वर्ष के लिए मिली ग्रेडिंग की वैधता इसी साल दिसंबर समाप्त हो रही है। इसे देखते हुए नवीनीकरण के लिए पहल शुरू कर दी गई है। वर्तमान में विवि को नैक से 'ए' ग्रेड प्राप्त है। 'ए' ग्रेड को बरकरार रखने के लिए तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।

नए नियमों से होगी शिक्षकों की नियुक्ति

वर्तमान में शिक्षकों के 77 पद रिक्त चल रहे हैं। कुलपति ने बताया कि यूजीसी के नए मानक के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति जल्द की जाएगी।

मारीशस से समझौता जल्द

नेपाल के बाद मारीशस से शैक्षिक आदान-प्रदान के लिए एमओयू पर जल्द हस्ताक्षर होने की संभावना है।

अंतर्राष्ट्रीय शास्त्रार्थ जुलाई 12 से

तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शास्त्रार्थ सम्मेलन 12 जुलाई से होगा। सम्मेलन में अब तक नेपाल, भूटान व इटली के विद्वानों से स्वीकृति मिली है।

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु 

- छात्रावासों, शैक्षणिक व प्रशासनिक भवनों व अतिथि गृह का जीर्णोद्धार ।

- विशिष्ट पुरातन छात्र-समागम।

- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षणिक विनिमय।

- दुर्लभ पांडुलिपियों का संपादन व प्रकाशन ।

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Posted By: Vandana Singh

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