वाराणसी से 45 घंटे बाद ब्वायलर लदा ट्रक आगे बढ़ा, गाजीपुर तक पहुंच पाना बना चुनौती, शिपिंग कंपनी की कार्यशैली से प्रशासन नाराज
ओडिशा से लखीमपुर खीरी जा रहा 200 टन वजनी ब्वायलर लदा मेगा ट्रक वाराणसी के डाफी टोल प्लाजा पर 45 ...और पढ़ें
HighLights
200 टन वजनी ब्वायलर ट्रक डाफी से आगे बढ़ा।
वाराणसी में 45 घंटे तक फंसा रहा मेगा ट्रक।
गाजीपुर तक पहुंचने में बिजली तार, सड़क बाधा।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पांच माह से सफर कर रहा मेगा ट्रक सप्ताह भर तो चंदौली और बनारस तक पार नहीं कर सका है। हालांकि लंबे समय के इंतजार के बाद अब बुधवार को चार घंटे की कड़ी मेहनत के बाद डाफी टोल प्लाजा से एक ट्रक आगे बढ़ा है।
यह ट्रक ओडिशा से लखीमपुर खीरी के लिए 200 टन वजनी ब्वायलर लेकर निकला था और इसका वजन 308 चक्कों वाले ट्रेलर पर था। डाफी में 45 घंटे रुकने के बाद यह ट्रक आगे के लिए रवाना हुआ।
मंगलवार को डाफी टोल प्लाजा के उत्तर दिशा में बनाए गए वैकल्पिक रास्ते पर ट्रक पूरे दिन फंसा रहा और रात तक निकल नहीं पाया। इसके बाद, बुधवार को काफी मेहनत के बाद दोपहर 12 बजे ट्रक हाइवे पर आ सका।
बुधवार की सुबह एसीपी ट्रैफिक प्रवीण कुमार, यातायात निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। एसीपी प्रवीण कुमार ने ब्वायलर को लेकर लगने वाले जाम के लिए शिपिंग कंपनी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यहां रात में भी काम किया जा सकता था, लेकिन केवल दिन में काम करने से सभी को समस्या हो रही है।
उन्होंने सुझाव दिया कि कर्मचारियों को लगाकर शहर की सीमा पार कराई जाए और रात में इसे कहीं रोकना नहीं चाहिए। ब्वायलर के कारण सड़कों पर भीड़ इकट्ठा हो रही है, जिससे किसी भी प्रकार की घटना हो सकती है। डाफी से निकलकर ट्रक मोहनसराय होते हुए राजातालाब से रिंग रोड पर जाएगा।
इस घटना ने ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर किया है, खासकर जब भारी वाहनों का आवागमन होता है। स्थानीय प्रशासन को इस प्रकार की समस्याओं से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।
ट्रक के फंसने से स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई वाहन चालक और यात्री घंटों तक जाम में फंसे रहे। इस स्थिति ने न केवल यातायात को प्रभावित किया, बल्कि स्थानीय व्यवसायों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला।
एसीपी प्रवीण कुमार ने कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए बेहतर योजना बनानी होगी। उन्होंने ट्रैफिक प्रबंधन के लिए अधिक संसाधनों की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि बिजली के तारों और रोड पर बैनर होर्डिंंग हटाने के साथ ही सेतु से गुजरना भी चुनौती है। लिहाजा इसके गाजीपुर पहुंचने में भी लंबा समय लगना तय माना जा रहा है।
