वाराणसी, जेएनएन। उत्‍तर प्रदेश के बनारस से गुजरात के बनास तक का रिश्‍ता जुड़ पशुपालन और श्‍वेत क्रांति से जुड़ रहा है। रिश्ता तो लंबे समय से रहा है लेकिन अब डेयरी के संचालन और मैनेजमेंट के लिए भी पशुपालकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस बाबत साझा टीम की ओर से चार दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसमें वाराणसी के पशुपालक भी शामिल होने के लिए बनास जा रहे हैं। टीम ने बताया कि सभी का पूर्व में प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया था। अब चयन के बाद सभी को प्रशिक्षण देने के लिए गुजरात के बनास भेजा जा रहा है। 

पशुपालन के जरिए किसानों को खुशहाल बना दुग्ध व्यवसाय से जोड़ आय बढ़ाने के उद्देश्य से डेयरी के संचालन व मैनेजमेंट का चार दिवसीय प्रशिक्षण लेने हेतु शनिवार को 50 किसानों का दल अपरान्ह साढ़े तीन बजे मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ गुजरात रवाना हुआ। दल में शामिल किसान गांव में बनी बनास व अमूल की समितियों के सचिव हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम्य डेयरी के संचालन में सुधार लाकर किसानों को सीधे फायदा पहुंचाना हैं। ऐसे में गुजरात की श्‍वेत क्रांति का फायदा यूपी को भी मिलना तय है। 

बनासकांठा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड,पालनपुर (गुजरात) व वाराणसी दुग्ध एसोसिएशन की ओर से बनास (पालनपुर) में 18 से 24 सितंबर तक सचिव प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हैं। सचिव प्रशिक्षण प्राप्त कर वहां के कल्चर व सिस्टम को देख अपने जीवन के साथ-साथ अन्य किसानों के जीवन में परिवर्तन लाएंगे।

इसके बाद दो अक्टूबर को भी वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर व भदोही जिले के विभिन्न समितियों के 60 सचिव प्रशिक्षण लेने गुजरात जाएंगे। दो शिफ्ट में 110 सचिवों को प्रशिक्षण हेतु भेजा जाना प्रस्तावित हैं।इससे पूर्व गत 19 दिसम्बर व दो जनवरी को 60-60 गो- पालकों का दल गुजरात गया था। टीम का नेतृत्व डा. एस. वी. पटेल, चंद्रमोहन सिंह व गौरव उपाध्याय कर रहे हैं।

Edited By: Abhishek Sharma