लखीमपुर खीरी के प्लांट में इंस्टाल होने जा रही बेल्जियम की दैत्याकार मशीन, पहला अनोखा चीनी मिल जहां प्लास्टिक भी बनेगा
लखीमपुर खीरी में भारत का पहला चीनी से प्लास्टिक बनाने वाला प्लांट स्थापित हो रहा है, जिसमें बेल्जियम की एक ...और पढ़ें

लखीमपुर खीरी में लगेगा भारत का पहला चीनी से प्लास्टिक बनाने वाला प्लांट बेल्जियम की विशाल मशीन पहुंची वाराणसी।
HighLights
लखीमपुर खीरी में भारत का पहला चीनी से प्लास्टिक प्लांट स्थापित हो रहा है।
बेल्जियम से आयातित विशाल मशीन वाराणसी पहुंची, स्थापना की तैयारी।
चीनी के सह-उत्पाद से प्लास्टिक बनेगा, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को लाभ।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। भारत का पहला चीनी से प्लास्टिक बनाने वाला प्लांट बेल्जियम की दैत्याकार मशीन के साथ लखीमपुर खीरी में स्थापित हो रहा है। यह प्लांट कुंभी पीएलए (पॉली लैक्टिक एसिड) डिवीजन के तहत कार्य करेगा और बलरामपुर चीनी मिल द्वारा संचालित किया जाएगा। इस प्लांट में चीनी के सहउत्पाद के रूप में उच्च गुणवत्ता का प्लास्टिक भी निर्मित किया जाएगा।
देश में आमतौर पर चीनी मिलों की मशीनरी उपलब्ध है, लेकिन बड़े पैमाने पर प्रोसेसिंग की दक्षता के कारण इस विशेष मशीन को बेल्जियम से आयात किया गया है। वाराणसी में स्थित शिपिंग कंपनी जे एम बख्शी द्वारा मई में समुद्र के रास्ते ओडिशा पहुंचाई गई यह विशाल बायलर मशीन, जो लगभग 200 टन वजनी है, सोमवार को दोपहर साढ़े तीन बजे डाफी टोल प्लाजा के पास पहुंची।
मशीन को डाफी टोल प्लाजा के पहले सड़क पर लगे बोर्ड को हटाने के बाद उत्तर की ओर बन रहे वैकल्पिक रास्ते से निकाला जाएगा। इसके लिए बिजली के खंभे को भी हटाया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण रास्ते की मरम्मत के लिए एक टीम काम कर रही है। इस दौरान एनएचएआई की टीम और स्थानीय पुलिस भी मौजूद है।
विशालकाय मशीन को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है, जहां लोग सेल्फी और रील बनाने में व्यस्त हैं। इस मशीन के साथ लगभग 40 लोगों की टीम भी है। कंपनी के कर्मचारियों ने बताया कि मशीन का वजन तो अधिक है, लेकिन उसकी ऊंचाई इतनी नहीं है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें वायरल होने के कारण कुछ समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ट्रक की गति 40 किमी प्रति घंटा तक है, लेकिन रास्ता साफ नहीं है। ट्रक चालक सुरेश चंद्रा ने बताया कि मशीन के परिवहन में प्रतिदिन लगभग 200 लीटर डीजल की खपत हो रही है।
टीम के सदस्यों ने बताया कि एक वर्ष पहले इस मार्ग का सर्वेक्षण किया गया था, लेकिन पुल निर्माण के कारण कई स्थानों पर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इस कार्य के लिए 14 गाड़ियां भी हैं, जिनमें से एक ऊंचाई पर ट्रक को खींचने के लिए है, जबकि अन्य गाड़ियां जेसीबी, हाइड्रा, ट्रेलर, क्रेन और सिविल तथा मैकेनिकल टीम के लिए हैं।
इस प्लांट की स्थापना से न केवल प्लास्टिक उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक सकारात्मक कदम होगा, क्योंकि यह चीनी के सहउत्पाद से निर्मित होगा। यह परियोजना भारत में प्लास्टिक उत्पादन के क्षेत्र में एक नई दिशा प्रदान करेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी। लखीमपुर खीरी में स्थापित होने वाला यह प्लांट न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की औद्योगिक प्रगति में भी एक महत्वपूर्ण योगदान देगा।
