308 चक्कों वाले 'मेगा ट्रक' की अनदेखी तस्वीरें चौंकाने वाली, ओडिशा से पांचवें महीने में वाराणसी पहुंच सकी विशालकाय ब्वायलर मशीन
ओडिशा से चला 308 चक्कों वाला विशालकाय ट्रक पांच महीने की लंबी यात्रा के बाद वाराणसी पहुंचा है। यह ट्रक ...और पढ़ें

308 चक्कों वाले मेगा ट्रक का वाराणसी आगमन: ओडिशा से लखीमपुर खीरी तक की लंबी यात्रा।
HighLights
308 चक्कों वाला विशालकाय ट्रक पांच महीने बाद वाराणसी पहुंचा।
200 टन वजनी बॉयलर मशीन लखीमपुर खीरी प्लांट ले जाई जा रही।
40 लोगों की टीम चुनौतियों के बीच ट्रक को मंजिल तक पहुंचा रही।
रवि पांडेय, वाराणसी। देश में चर्चा में बना हुआ 308 चक्कों वाला ट्रक चर्चा में कई मायनों में बना हुआ है। वहीं पांच महीने पहले चला ट्रक कड़ी मशक्कत के बाद सोमवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी पहुंचा तो ट्रक ला रहे कर्मी भी सुखद भावों में डूब गए। कहां रहते हैं सभी लोग? पूछने पर छूटते ही बताने लगे कि ट्रक ही हमारा घर है। ट्रक के केबिन के ठीक पीछे पूरी गृहस्थी है। खाने बनाने से लेकर आराम करने और खटिया चटाई तक का जुगाड़ ही पांच महीनों तक सभी को घर जैसा फील देता रहा।
दरअसल भारत का पहला अनोखा प्लांट लखीमपुर खीरी के कुंभी पीएलए (पॉली लैक्टिक एसिड) डिवीजन में लग रहा है जो चीनी से बेहतर उत्पाद बनाएगा। बलरामपुर चीनी मिल का यह नया प्लांट कुंभी पीएलए के नाम से बन रहा है। जहां शिपिंग कंपनी जे एम बख्शी बेल्जियम से समुद्र के रास्ते मई महीने में ओडिशा पहुंची ब्वायलर मशीन करीब 200 टन वजनी मशीन लेकर सोमवार को साढ़े तीन बजे दोपहर में डाफी टोल प्लाजा के पास पहुंची।

वाराणसी में डाफी टोल प्लाजा के पहले सड़क पर लगे बोर्ड को हटाने के बाद उत्तर की तरफ बन रहे वैकल्पिक रास्ते से मशीन को मंगलवार को निकाला जाएगा। इसके अलावा यहां बिजली के खंभे को हटाया जा रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण रास्ते की मरम्मत के लिए टीम लगी रही। इस दौरान एनएचएआई की टीम और स्थानीय पुलिस लगी रही।
308 चक्कों वाले ट्रक पर लदा विशालकाय मशीन देखने के लिए लोगों की भीड़ लग रही है जहां लोग सेल्फी और रील बनाने में मस्त रहे । इस मशीन के साथ करीब 40 से ज्यादा लोगों की टीम है। डाफी से मशीन के निकलने के बाद मोहनसराय में बने फुट ओवर ब्रिज को तोड़कर राजातालाब होते हुए रिंग रोड तक ले जाकर वहां से हरहुआ की तरफ भेजा जाएगा। साथ में चल रही एनएचएआई टीम ने बताया कि ट्रक की लंबाई को 308 पहिए में बंटा है इसलिए विश्वसुंदरी पुल पर भी दिक्कत नहीं हुई। साथ में स्थानीय पुलिस टीम भी रही ।

ट्रक पर ही बनी कर्मचारियों की गृहस्थी
ट्रक पर बैठे कर्मचारी साजिब ने बताया कि चार महीने से ज्यादा समय बीत गया है और करीब 30 लोगों का खाना इसी ट्रक पर बन रहा है। रात में ट्रक जहां रुकता है वहां खाने के बाद इसी पर तिरपाल से बने वैकल्पिक घर में सो जाते हैं। इसी पर चारपाई और गृहस्थी के सभी सामान हैं। कपड़ा सुखाने के लिए ब्वायलर के बीच रस्सी बांधकर उसपर कपड़ा डाल देते हैं। राशन पानी के साथ ही चूल्हा चौका भी है। बताते हैं कि नहाना धोना खाना सोना और बरसात में खुद को बचाना भी इसी पर ही होता है। सभी कर्मी हंसते हुए बताते हैं कि घर का फील आता है इस ट्रक पर।
200 लीटर प्रतिदिन लग रहा डीजल
विशालकाय ब्वायलर के बारे में बात करने पर कंपनी के कर्मचारियों ने बताया कि इससे वजनी सामान गया है लेकिन उसकी ऊंचाई इतनी नहीं थी। सोशल मीडिया के कारण यह वायरल हो रहा है जिसके कारण दिक्कत भी हो रही है। ट्रक की स्पीड 40 किमी घंटा तक है लेकिन रास्ता क्लियर नहीं है। ट्रक चालक सुरेश चंद्रा ने बताया कि करीब 200 लीटर डीजल प्रतिदिन लग रहा है। अब तक दो करोड़ से अधिक का डीजल खर्च हो चुका है।

मशीन के साथ 14 गाड़ियां और 40 लोगों की टीम
विशालकाय मशीन के साथ चल रही टीम के लोगों ने बताया कि एक वर्ष पहले सर्वे हुआ था लेकिन उसके बाद कई जगह पुल निर्माण के कारण समस्या हो रही है। साथ में 14 गाड़ियां जिसमें एक गाड़ी ऊंचाई पर ट्रक को खींचने के लिए और बाकी दो जेसीबी, दो हाइड्रा, दो ट्रेलर, क्रेन और पांच वाहन सिविल और मैकेनिकल तथा टेक्निकल टीम के लिए है। उम्मीद सभी जता रहे हैं कि नवरात्र के पहले कृपा रही तो गाड़ी मिल तक जरूर पहुंच जाएगी।
