वाराणसी, जेएनएन। महाशिवरात्रि पर लगातार 67 घंटे भक्तों को दर्शन का सौभाग्य देने के बाद बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ मंगलवार की रात विश्राम पर गए। रविवार की भोर से दर्शन शुरू हुआ तभी से लगातार दर्शन जारी था। इसमें भक्तों के भाव के आगे बाबा पूरे तीन दिन-दो रात भक्तों को दर्शन देते रहे। रात 11 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद किए गए। वास्तव में महाशिवरात्रि ही ऐसा दिन होता है जब बाबा दरबार रात में भी खुला रहता है और विवाह की रस्म के रूप में चार प्रहर की आरती की जाती है।

इससे हर साल बाबा का जागरण 44 घंटे का होता रहा लेकिन इस बार कुंभ का पलट प्रवाह के कारण एक दिन पहले ही भक्तों का रेला उमडऩे से मंदिर प्रशासन को विवाह की पूर्व रात्रि पर भी भक्तों के लिए बाबा दरबार के पट खोले रखने का निर्णय लेना पड़ा था। साथ ही गर्भगृह में प्रवेश के बजाय झांकी दर्शन कराया गया। महाशिवरात्रि की पूरी रात चार प्रहर की आरती के साथ मंगलवार को दिन भर भी भक्तों का रेला उमड़ता रहा।

दर्शन के लिए लगी कतार का एक सिरा गोदौलिया, दशाश्वमेध तो दूसरा नीचीबाग के आगे रहा। इससे पूरा परिक्षेत्र हर हर महादेव के उद्घोष से गूंजता रहा। भक्तों की भीड़ के कारण गंगा तट से लेकर बाबा दरबार समेत चार किलोमीटर के इलाके में गलियां -सड़कें ठंसी रहीं। 

Posted By: Abhishek Sharma

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