वाराणसी, जेएनएन। गंगा के साथ ही वरुणा एवं गोमती नदी ने भी भयावह रूप धारण कर लिया है। इसके कारण सैकड़ों बीघा फसल भी डूब गई है। कई गांवों का संपर्क टूट गया है। बाढ़ की चपेट में करीब 64 गांव आ गए हैं, जिसमें लगभग ढाई हजार लोग प्रभावित हुए हैं। प्रभावित लोगों को जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए राहत केंद्र में पहुंचाया गया है। साथ ही नावों की भी व्यवस्था की गई है। लोगों में राहत सामग्री भी वितरित की गई। प्रभारी मंत्री आशुतोष टंडन के साथ ही जिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह, उप जिलाधिकारी सदर महेंद्र कुमार श्रीवास्तव व स्थानीय पार्षदों ने भी राहत सामग्री बांटी।

एसडीएम श्रीवास्तव ने बताया कि सलारपुर, गोयनका संस्कृत महाविद्यालय, सरैया, मारुतिनगर, पुनिया, तुलसी निकेतन, ढेलवरिया, कोनिया आदि क्षेत्रों में अधिकारियों ने दौरा किया और प्रभावितों में राहत सामग्री वितरित की गई। राहत सामग्री पैकेट में चावल से लेकर नमक तक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री राहत कोष की तरफ से बाढ़ प्रभावितों को एक-एक पैकेट बांटा गया। इसमें 10 किग्रा चावल, 10 किलो आटा, दो किग्रा अरहर की दाल, एक किग्रा रिफाइन तेल, आधा किग्रा नमक, दो किग्रा भूना चना, 10 पैकेट बिस्कुट, हल्दी, धनिया, माचिस आदि शामिल था। इसके साथ ही अलग से पांच किग्रा लाई, 10 किग्रा आलू भी करीब 750 लोगों में वितरित किया गया।

टेकुरी, लक्ष्मीसेनपुर में घुसा गोमती का पानी : वाराणसी-गाजीपुर की सीमापार गोमती नदी के किनारे बसे क्षेत्र के टेकुरी, लक्ष्मीसेनपुर गाव में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। वहा इस समय गोमती नदी का कहर जारी है। गावों में पानी घरों में घुसने लगा है। सैकड़ों बीघे तिल, उतैला, उर्द, पशुओं के चारे धान सब जलमग्न हो गया है। वही टेकुरी, लक्ष्मीसेनपुर का संपर्क मार्ग भी डूब गया है। गांवों के लोग पलायन करने लगे हैं। यहा के पूर्व प्रधान भीम सिंह, सूर्यकात सिंह, कमलेश यादव, राहूल सिंह, शशिकात, वीरेंद्र प्रजापति, रामानंद सिंह ने बताया कि स्थिति भयावह है। यहा सासद ने अपने प्रतिनिधि जयप्रकाश पांडेय को भेजकर जानकारी ली।

वरुणा नदी में बढ़ाव से पलायन : वरुणा नदी के लगातार बढ़ाव के रुख के चलते तटीय इलाके की पूरी फसलें डूब गई। अब तटीय क्षेत्र से गाव की ओर पलायन की तैयारी में जुटे हुए हैं। क्षेत्र के रसूलपुर, चक्का, लक्षीपुर, रामेश्वर, औसानपुर, पाडेयपुर, जगापट्टी, परसीपुर, कोइराजपुर, दानियालपुर गाव पूरी तरह प्रभावित हैं। किसान मधुवन यादव, छोटेलाल, दल्लू, कल्लू, रामजी, रमदत्त तिवारी, रामगोपाल, जियावन, योगेंद्र सिंह, अरविंद ,महेंद्र सिंह, महानंद सिंह, ओमप्रकाश, भोला, पन्ना, राजकुमार, राधेश्याम, मनोज, अजीत व अरविंद, राजेश सिंह व अशोक सिंह के अनुसार उतैला, बाजरा, मक्का, मुंगतिल्ली, कंडा, धान व गन्ना की खड़ी सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है। साथ ही पशुओं के सामने चारे की समस्या बनी है।

हजारों एकड़ फसल प्रभावित, संक्रामक फैलने की आशंकार : क्षेत्र स्थित गोमती नदी में पानी के बढ़ाव से गोमती तटीय गावों मौके पर जायजा लेने किसी सक्षम अधिकारी के न पहुंचने पर किसानों की मुश्किलें और बढ़ती जा रही हैं। गोमती तटीय गाव उधोरामपुर, बेला, रौना, रजला, कुरौली, अजगरा पानी से घिर जाने से ग्रामीणों की नींद उड़ गयी है। ग्रामीण सुरेंद्र, दशमी राम, योगेंद्र, धीरज चौबे, माया शकर सिंह, वीरेंद्र प्रताप, ओंकार नाथ, जगदीश सिंह, सुशील पांडेय, राजेश सिंह ने बताया कि चार दिन के भीतर धीरे-धीरे पानी घरों के तरफ बढ़ता जा रहा है। बताया कि जब जब बाढ़ आती है, तब तब विभिन्न प्रकार के रोग गाव में फैलते हैं, तथा गोमती तटीय क्षेत्र के विषैले जानवर घरों में आने लगे हैं।

यहां बनाया गया है राहत केंद्र -प्राथमिक विद्यालय, सरैया - माता प्रसाद बेसिक पाठशाला, शाहदुल्ला - रासिद उत्साद उलूम मदरसा, सरैया - गोयनका संस्कृत महाविद्यालय - प्राथमिक विज्ञान, सलारपुर - प्राथमिक विद्यालय, नगवां - प्राथमिक विद्यालय, पिंटी ढाब - प्राथमिक विद्यालय, कोनिया -प्राथमिक विद्यालय, ढेलवरिया - सांस्कृतिक शंकुल भवन, चौकाघाट, हुकुलगंज, खजुरी, पहाड़पुर

बाढ़ की समस्या हो तो यहां करें

फोन बाढ़ नियंत्रण कक्ष : 0542- 2508877

टोल फ्री नंबर : 1077

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