वाराणसी, जेएनएन। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की तरह ही पिछड़ा वर्ग के बहुतायत छात्रों को भी इस वित्तीय वर्ष में स्कॉलरशिप व शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि नहीं मिली। ये सभी 11वीं, 12 वीं से हॉयर शिक्षा से जुड़े रहे। तकनीकी शिक्षा से जुड़े बहुतायत छात्रों ने अच्छे इंस्टीट्यूट में इसी वास्ते दाखिला भी लिया था कि सरकार से शुल्क प्रतिपूॢत व स्कॉलरशिप मिल जाएगी। कुछ के परिजनों ने तो बकायदा बैंक से कर्ज तक ले रखा है।

स्कॉलरशिप के लिए ऑनलाइन 95 हजार 544 आवेदन जांच में सही मिले। मसलन, इनके फार्म में कोई गड़बड़ी नहीं थी। शासन की ओर से 72 हजार 73 छात्रों को स्कॉलरशिप दिया गया लेकिन शेष 23 हजार 471 के खाते में कुछ नहीं आया। हालांकि विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि बजट को देखते हुए अंकों के फीसद के आधार पर स्कॉलरशिप मिलता है। इस बार शासन ने 53.22 फीसद अंक हासिल करने वाले छात्रों को स्कॉलरशिप दिया। शेष बजट के अभाव में स्कॉलरशिप नहीं मिली। दूसरी तरफ छात्रों का कहना है कि तय मानक से अधिक फीसद अंक वालों को भी नहीं मिला है।

कमोवेश, कुछ यही हाल शुल्क प्रतिपूॢत की भी रही। कुल 95 हजार 544 स्वीकृत आवेदन में से सिर्फ 55 हजार 250 को ही यह राशि मिली। 40 हजार 294 के खाते में कुछ नहीं आया। सभी को अपनी जेब से लगाकर पढ़ाई पूरी करनी पड़ी। शुल्क प्रतिपूॢत उन्हें ही मिल सकी जो 59 फीसद से अधिक अंक अॢजत किए थे। छात्रों का आरोप यहां भी वहीं है कि मानक में पारदर्शिता नहीं है।

'स्कॉलरशिप व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए छात्र ऑनलाइन फार्म भरते हैं। फार्म गड़बड़ होने पर उसे ठीक करने का मौका भी दिया जाता है। यह सही है कि बहुतायत छात्र शुल्क प्रतिपूॢत व स्कॉलरशिप से वंचित रह गए लेकिन यह बजट के आधार पर मेरिट अनुसार छात्रों के खाते में सीधे धनराशि भेजी गई। कोई छात्र लिखित शिकायत करेगा तो उसे संज्ञान में लिया जाएगा।' -यादवेंद्र सिंह, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी।

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