उन्नाव में अपनी बर्बादी की पटकथा सुना दलदल से अपराधियों को निकाल रहे हिस्ट्रीशीटर, 176 ने दो साल से नहीं किया गुनाह
उन्नाव में हिस्ट्रीशीटर अब अपराध छोड़कर सामान्य जीवन जी रहे हैं और अन्य युवाओं को भी सही राह दिखा रहे ...और पढ़ें
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जिले में 1045 हिस्ट्रीशीटर में से 176 ने दो साल से नहीं किया कोई अपराध।
HighLights
हिस्ट्रीशीटर रामगोपाल ने 23 युवाओं को अपराध से बचाया।
पुलिस की पहल से 176 हिस्ट्रीशीटरों ने गुनाह छोड़ा।
अपराध छोड़ चुके लोग युवाओं को सही राह दिखा रहे।
मोहित पांडेय, उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में लतीफपुर गांव के रामगोपाल ने वर्ष 1990 में डकैती और 1994 में हत्या की थी। इसके साथ ही दबंगई व रसूख के लिए कई अपराध किए। इसके बाद पुलिस ने उनकी हिस्ट्रीशीट खोल दी। दोनों मामलों में जेल जाने के बाद रामगोपाल ने बहुत कुछ खो दिया तो अपराध से नाता तोड़कर सामान्य जीवन जीने का निर्णय लिया।
वर्तमान में वह गांव में रहकर खेती करने संग सब्जी बेच परिवार का भरण-पाषण कर रहे। पुलिस की पहल पर वह आगे बढ़े और परिणाम यह हुआ कि अकेले उनकी सीख मानकर हिस्ट्रीशीटर बन चुके 23 युवाओं ने अपराध का रास्ता छोड़ अपना काम शुरू कर दिया।
तत्कालीन एसपी दीपक भूकर की ओर से शुरू की गई पहल और वर्तमान इसे आगे बढ़ा रहे एसपी जयप्रकाश सिंह के कारण यह संभव हुआ है। इंस्पेक्टर अखिलेश चंद्र पांडेय बताते हैं कि हिस्ट्रीशीटरों का समय-समय पर सत्यापन किया जाता है। पुलिस की मुहिम से अब कई अपराधियों ने खुद को समाज की मुख्यधारा से जोड़ लिया है।
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कभी दबंगई व रसूख के दम पर क्षेत्र में खौफ पैदा करने वाले हिस्ट्रीशीटर चेहरे अब पुलिस की मुहिम से जुड़कर अपराध की राह पर बढ़ रहे युवाओं को रोकने के लिए अपने ही अतीत का आईना दिखा रहे हैं। अब ‘भटके’ युवाओं को अपराध की दुनिया छोड़ने के लिए बताते हैं कि गुनाह की शुरुआत भले छोटी हो, लेकिन उसका अंत जिंदगी की बर्बादी पर होता है।
अपनी कहानी सुना यह बताने का प्रयास कर रहे कि अपराध ने उनसे क्या छीना और परिवार को किन मुश्किलों से गुजरना पड़ा। इस प्रयास के बाद 176 हिस्ट्रीशीटरों ने गुनाह से पीछा छुड़ाया। पिछले दो साल से इन पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
जिले में वर्तमान में 1045 हिस्ट्रीशीटर हैं। पुलिस ने इन्हें सही राह पर लाने के लिए उन 52 शांत हिस्ट्रीशीटरों को तैयार किया जो गुनाह के दलदल से बाहर आकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। सत्यापन के लिए हर माह सभी हिस्ट्रीशीटरों को थाना बुलाया जाता है।
वह पुलिस की निगरानी व संवाद के बीच यह बताने का प्रयास करते हैं कि अपराध के शुरुआती दौर में दबंगई और रौब अच्छे लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे मुकदमे, जेल व अदालत की दौड़भाग जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं। अपराध से मिली ‘पहचान’ कुछ समय बाद बोझ बन जाती है। इसका सीधा असर परिवार पर पड़ता है, जो गलती हमने की, वह आप मत करिए।
भक्ति के रास्ते पर हिस्ट्रीशीटर यदुवीर
मोहान निवासी 35 वर्षीय यदुवीर दोस्तों की संगत में पड़कर गुनाह के रास्ते पर चले गए। वर्ष 2017 में लूट के मुकदमे में जेल गए। अपराध बढ़े तो पुलिस ने हिस्ट्रीशीट खोल नकेल कसनी शुरू कर दी। पुलिस निगरानी ने पीड़ा दी।

इसी बीच थाना में चौपाल में शांत हिस्ट्रीशीटरों की बात सुन अपराध से तौबा कर लिया। वर्तमान में खेती कर जीवन यापन कर रहे हैं। मोहल्ले में गणपति उत्सव समेत अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में वह हिस्सा लेते हैं और भक्ति के रास्ते पर चल पढ़े हैं। इंस्पेक्टर शरद कुमार ने बताया कि यदुवीर पर पिछले दो साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ।
25 वर्ष से नहीं किया अपराध
गंगाघाट थाना के हिस्ट्रीशीटर बसंत ने बताया कि उन पर लगभग 12 मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2000 में हिस्ट्रीशीट खुली थी। एक बार जेल गए। अपराध करने के बाद जीवन में परिवार की प्रतिष्ठा, खुद का सम्मान सब खो दिया। इसके बाद अपने आचरण में सुधार कर लिया। लगभग 25 वर्ष से कोई अपराध नहीं किया।
पुलिस की मुहिम से जुड़ने के बाद अपराध के दलदल से 13 युवाओं को बाहर निकाला। वे सभी नौकरी या अपना काम कर रहे हैं। दो साल से इन पर एनसीआर तक दर्ज नहीं हुई। इसी तरह, फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के रणधीर खेड़ा मजरा इस्माइलपुर नौगवां निवासी ब्रजेश कुमार की वर्ष 2024 में पुलिस ने हिस्ट्रीशीट खोली थी।
सत्यापन के दौरान थाना पहुंचे ब्रजेश को शांत हिस्ट्रीशीटरों की बात समझ आ गई और अपराध छोड़ नगर पंचायत में अपनी दुकान खोल परिवार का जीवन यापन करने लगे।
अपराध छोड़ चुके लोगों के अनुभव उन युवाओं को सही राह दिखा रहे हैं, जो किसी कारणवश अपराध की ओर बढ़ रहे हैं। लोगों को अपने अतीत की गलतियों से सीख लेकर दूसरों को भी अपराध से बचाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध से दूर हो चुके लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। -जयप्रकाश सिंह, एसपी उन्नाव।
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