उन्नाव में खाद का संकट गहराया, निजी दुकानों पर महंगी डीएपी मिलने से किसान परेशान
उन्नाव जिले में खाद की किल्लत बनी हुई है, जिससे किसान महंगे दामों पर निजी दुकानों से डीएपी खरीदने को मजबूर हैं। ,

सहकारी समितियों की हड़ताल के कारण वितरण व्यवस्था प्रभावित है
HighLights
उन्नाव में खाद की किल्लत, किसान महंगे दाम पर डीएपी खरीद रहे।
सहकारी समितियों की हड़ताल से खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित हुई।
अधिकारी बोले, जल्द सामान्य होगी स्थिति, अतिरिक्त खाद मिलेगी।
जागरण संवाददाता, उन्नाव। जिले में खाद की किल्लत बरकरार है। सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल के चलते खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। लोहचा स्थित इफको केंद्र पर भी पिछले 20 दिनों से खाद नहीं पहुंची है। ऐसे में आलू, सरसों और गेहूं की बोआई के लिए डीएपी की तलाश में किसान भटक रहे हैं।
मजबूरी में किसानों को निजी दुकानों से महंगे दाम पर खाद खरीदनी पड़ रही है। हालांकि कि विभाग का दावा है खाद की कमी नहीं है। सोमवार से व्यवस्था में बदलाव दिखाई देगा। जिले में 167 केंद्रों से खाद वितरण होता है। लेकिन सहकारी समितियों के सचिव हड़ताल पर चले गए है। इससे खाद वितरण व्यवस्था प्रभावित है। किसानों का कहना है कि सरकारी दर पर 1350 रुपये में मिलने वाली डीएपी निजी विक्रेता 1700 से 1800 रुपये तक में बेच रहे हैं। इससे किसानों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल के बावजूद खाद वितरण पूरी तरह बंद नहीं है। एग्रीजंक्शन, डीसीडीएफ, पीसीएस और इफको समेत अन्य केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध कराई जा रही है। फिलहाल जिले के 42 केंद्रों से खाद का वितरण किया जा रहा है। वहीं, हड़ताल समाप्त कराने और वितरण व्यवस्था सामान्य करने के लिए सहकारी समितियों के सचिवों से लगातार बातचीत की जा रही है। एडीएम सुशील कुमार ने भी बैठक कर स्थिति की समीक्षा की है।
अधिकारियों के अनुसार अब तक 33 समितियों के सचिव काम पर लौट आए हैं। शेष सचिवों के भी सोमवार तक वापस आने की संभावना है। इससे समितियों पर खाद वितरण व्यवस्था दोबारा सुचारु होने की उम्मीद है।एआर कोऑपरेटिव रवींद्र कुमार सिंह ने बताया कि जिले को 2600 मीट्रिक टन खाद और मिलने वाली है। यह खाद दो से तीन दिनों में पहुंचने की संभावना है। फिलहाल जिले में पांच हजार एमटी यूरिया, दो हजार एमटी डीएपी और 300 एमटी एनपीके का स्टाक उपलब्ध है। नई खेप पहुंचने और सचिवों की वापसी के बाद किसानों को खाद मिलने में राहत मिलेगी।