माखी दुष्कर्म पीड़िता के चाचा की पेशी में 6 सालों में ₹1 करोड़ खर्च, तिहाड़ से उन्नाव लाने का 'सुरक्षा घेरा' बना वजह
माखी दुष्कर्म पीड़िता के चाचा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से उन्नाव न्यायालय में पेशी के लिए लाने में छह ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
छह साल में पेशी पर एक करोड़ से अधिक खर्च।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में आवाज न आने से शारीरिक पेशी।
तिहाड़ से उन्नाव लाने में भारी पुलिस सुरक्षा घेरा।
माेहित पांडेय, उन्नाव। पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर पर जानलेवा हमले के मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में 10 साल की सजा काट रहे माखी दुष्कर्म कांड की पीड़िता के चाचा की उन्नाव न्यायालय में चल रहे चार मुकदमों की पेशी कराने में सरकार का छह साल के अंतराल में एक करोड़ से अधिक का खर्च हो चुका है।
आरोपित द्वारा वीडियो कांफ्रेंसिंग में आवाज सुनाई न देने समेत अन्य दलीलों की वजह से सुप्रीम व हाईकोर्ट की वीडियो कांफ्रेसिंग से पेशी कराने की गाइड लाइन का पालन नहीं हो पा रहा है। ऐसे में एक महीने में दो बार उसे दिल्ली से एक सीओ व 30-35 पुलिस कर्मियों के कड़े सुरक्षा घेरे में न्यायालय लाया जाता है। जिस रूट से आता है, वहां की पुलिस भी सुरक्षा देती है।
माखी दुष्कर्म कांड में दिल्ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर ने दुष्कर्म पीड़िता के चाचा पर वर्ष 2000 में माखी थाना में हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी मुकदमे में वर्ष 2002 में पीड़िता के चाचा पर पुलिस ने गैंग्सटर लगाया था।
20 नवंबर 2018 को माखी पुलिस ने आरोपित को दिल्ली से पकड़ा और जेल भेज दिया। वर्ष 2019 में उन्नाव न्यायालय ने हत्या के प्रयास के मुकदमे में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई। कुलदीप सेंगर पक्ष से जान का खतरा बता उसने सुरक्षा का हवाला देकर रायबरेली जेल फिर वहां से दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखने की मांग की। इस पर उसे तिहाड़ जेल भेज दिया गया।
न्यायालय के तत्कालीन अभिलेखागार प्रभारी अधिकारी गणेश तिवारी को पता चला कि आरोपित ने गैंग्सटर के मुकदमें में न्यायालय की पत्रावलियों में सफेदा लगा अपने नाम की जगह दूसरे का नाम लिखकर गैंग्सटर एक्ट में लाभ प्राप्त कर लिया। उनकी तहरीर पर सदर कोतवाली में आरोपित पर धोखाधड़ी, न्यायालय के प्रपत्रों में हेरफेर करने, दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर लाभ प्राप्त करने की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ।
इसी क्रम में एक नवंबर 2017 को सदर क्षेत्र के सिविल लाइंस निवासी राजकुमार सिंह ने आरोपित चाचा पर ब्लैमेलिंग, मानहानि, आईटी एक्ट रंगदारी मांगने व न देने पर जान की धमकी देेने व राजनीतिक द्वेष के चलते पंपलेट छपवाकर बंटवाने व छवि धूमिल करने का मुकदमा दर्ज कराया। वहीं 18 अगस्त 2018 को सीबीआई के गवाह यूनुस खान की स्वाभाविक मौत होने के मामले में हत्या करने की अफवाह उड़ाकर कब्र से शव खुदवा पोस्टमार्टम कराने व जांच में आरोप फर्जी निकलने पर छह सितंबर 2018 को माखी पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
7 बार वीडियो कांफ्रेसिंग से हुई पेशी
वहीं यूनुस के भाई जानमुहम्मद ने भी सात अक्टूबर 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के इसी आरोपित चाचा पर धोखाधड़ी व धमकी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।
इन चारों मामलों की सुनवाई उन्नाव न्यायालय में चल रही है। दो मामलों में वादी पक्ष से केस देख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता देवेंद्र नाथ शुक्ल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश हैं कि जेल से पेशी के लिए न्यायालय की दूरी अधिक हो, अभियुक्त संवेदनशील हो, प्रकरण अति महत्वपूर्ण हो ऐसे मामलों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आरोपित की पेशी कराई जाए।
दुष्कर्म पीड़िता के चाचा के चल रहे मुकदमों में पूर्व में छह से सात बार वीडियो कांफ्रेसिंग से पेशी हुई पर आरोपित आवाज ठीक से न सुनाई देने व अन्य बहाने बनाकर चर्चा में बने रहने के लिए उन्नाव न्यायालय जाने की बात करता है। जिस पर उसे सुरक्षा घेरे में उन्नाव न्यायालय लाया जाता है। वकील नियुक्त किए जाने के बाद भी वह न्यायालय में खुद जिरह करता है।
