उन्नाव में गोबर से बिजली, सिंचाई और खाद का नया युग: 45 घन मीटर का बायोगैस प्लांट से रोशन होंगे घर
उन्नाव के नवाबगंज ब्लॉक के अमरेथा गांव में 45 घन मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट तैयार है, जो गोशालाओं के गोबर से बिजली, सिंचाई और जैविक खाद उपलब्ध कराएगा।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
उन्नाव में 45 घन मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट।
गोबर से 50 परिवारों को बिजली, 40 एकड़ सिंचाई।
100 एकड़ भूमि के लिए जैविक खाद उपलब्ध।
ब्रजेश शुक्ल, उन्नाव। गोशालाएं महज गोसंरक्षण का ही पर्याय नहीं बन रही हैं, बल्कि इनमें संरक्षित गोवंशियों के गोधन से तमाम योजनाएं बल पा रही है। इन योजनाओं से बड़े जनमानस को आधुनिक व्यवस्थाओं के साथ जीवामृत जैसी जैविक खाद भी मिल रही है।
अब यही गोशालाएं व इनमें संरक्षित रोहिणी (गाय) गांव की बड़ी आबादी के लिए बिजली, सिंचाई व खेती आदि का प्रबंध भी कर रहे हैं। जनपद में यह व्यवस्था पूर्व में सिकंदरपुर सरोसी में बन चुके और अब नवाबगंज ब्लाक में बनने जा रहे बायोगैस प्लांट से पूरी होगी।
प्लांट लगाए जाने की तैयारी पूरी
जिले में 45 घन मीटर का एक बड़ा बायोगैस प्लांट लगाए जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यह प्लांट न सिर्फ आधा सैकड़ा परिवारों की बिजली आवश्यकता की पूर्ति करेगा, बल्कि क्षेत्र में 40 एकड़ भूमि पर सिंचाई प्रबंध के लिए पांच हार्स पावर की मोटर से सिंचाई का प्रबंध भी करेगा।
इतना ही नहीं इस प्लांट में प्रयोग होने वाला गोबर 100 एकड़ भूमि पर जैविक खाद की व्यवस्था भी करेगा। यह सब संभव होगा सरकारी गोशालाओं में संरक्षित गोवंशियों के गोबर से।
हसनगंज तहसील के ब्लाक नवाबगंज के अंतर्गत अमरेथा गांव में गोवर्धन वेस्ट टू वेल्थ योजना के तहत इस प्लांट को लगाए जाने के लिए मात्र 1500 वर्ग फीट में इस प्लांट को लगाए जाने के लिए मुख्य पशुचिकित्सा व पंचायतीराज विभाग काम शुरू कर चुका है।
भूमि उपलब्धता के बाद यहां प्लांट बनाए जाने के अलावा प्रतिदिन लगभग 1,000 से 1,125 किलोग्राम ताजा गोबर की व्यवस्था गोशालाओं से हाेगी। पंचायतीराज विभाग इस प्लांट को बनवाएगा।
छोटे उद्योगों के लिए उपयोगी
डीपीआरओ व सीवीओ से संबंधित प्लांंट को बनाए जाने के लिए डीएम ने डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तलब कर ली है। प्लांट बड़े स्तर का है। यह बड़े संयुक्त परिवारों, डेयरी फार्म, स्कूल-कालेज कैंटीन, गौशाला या छोटे उद्योगों के लिए भी बेहद उपयोगी होगा।
सीवीओ डाॅ. विनोद कुमार ने बताया कि गोशाला से गोबर की व्यवस्था मेरा विभाग करेगा। जबकि, 21 लाख रुपये की लागत से बायोगैस प्लांट का निर्माण पंचायतीराज विभाग करेगा।
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