जागरण संवाददाता, उन्नाव : कानपुर-लखनऊ रेल रूट पर क्रासिग और स्टेशन के बाद रेलवे ने घनी आबादी वाले क्षेत्रों से जुड़े ट्रैक को महफूज करना शुरू किया है। वह स्थल सुरक्षित किए जा रहे हैं, जहां सबसे ज्यादा हादसे हुए हैं। सीनियर डीईएन के निर्देश पर निर्माण अनुभाग के इंजीनियर ने स्थलों को चिन्हित करना शुरू किया है। आरसीसी की दीवार से यह स्थान घेरे जाएंगे। कुछ सेक्शन में कार्य शुरू है।

कानपुर-लखनऊ रेल सेक्शन में कुछ क्रासिग और केबिन के इर्दगिर्द आवासीय कॉलोनी, बस्ती या फिर फैक्ट्रियां हैं। जहां से लोगों का ट्रैक से होकर आना-जाना 24 घंटे लगा रहता है। प्रकाश व्यवस्था न होने की वजह से कई बार लोग अप और डाउन की ट्रेनों को न समझते हुए चपेट में आ जाते हैं। जनवरी से अब तक हुए हादसों पर नजर डाली जाए तो डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इन घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने सबसे ज्यादा मौत वाले प्वाइंट को नोटिस करते हुए उन्हें सुरक्षित करने के लिए कमर कसी है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार गंगाघाट रेलवे पुल से अजगैन, जैतीपुर सेक्शन में स्थलों को चिन्हित किया जा रहा है। सुरक्षा अधिकारियों के अलावा सेक्शन इंजीनियर को डीआरएम संजय त्रिपाठी ने निर्देशित किया है। उन्नाव रेल खंड में आइओडब्ल्यू शैलेंद्र कुमार की निगरानी में ट्रैक किनारे दीवार खड़ी की जा रही है।

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उन्नाव-रायबरेली रूट पर तीन क्रासिग

कानपुर-लखनऊ के अलावा रेलवे उन्नाव-रायबरेली रूट पर तीन क्रासिग पर दीवार खड़ी करेगा। इन क्रासिग में आवास विकास, हाईवे स्थित रायबरेली क्रासिग और 30 किमी दूर कोरारी शामिल है। रेलवे इंजीनियर के अनुसार 100 मीटर दीवार तैयार करने में करीब चार लाख रुपये का खर्च आएगा। अनुमानित बजट के साथ चिन्हित स्थलों की रिपोर्ट लखनऊ रेल मंडल भेजी जाएगी।

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जहां सबसे ज्यादा हादसे

- गंगा रेलवे पुल कानपुर छोर से 43 नंबर क्रासिग

- करोवन मोड़ और शराब मिल के पीछे का ट्रैक

- राजेपुर क्रासिग, बाबूगंज रेलवे कॉलोनी के पीछे

- लोकनगर क्रासिग और पश्चिम केबिन उन्नाव

- जैतीपुर स्टेशन और कुसुंभी हॉल्ट के बीच

- गंगाघाट स्टेशन व ऋषि नगर रेलवे केबिन

Posted By: Jagran