जागरण संवाददाता, उन्नाव : चोरी-लूट जैसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के नाम पर खेल करे तो हैरत कम होगी, पर ऐसी वारदातें जिनमें हत्यारोपितों के लिए फांसी की मांग उठी हो उसमें पुलिस खेल करे तो सीधे तौर पर ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा हो जाता है। गंगाघाट में मासूम-भाई बहन की नृशंस हत्या और माखी में 8 साल के बच्चे की बलि देने के मामले न केवल पुलिस कार्यशैली बल्कि सरकार की मंशा को तिलांजलि देने का काम कर रहे हैं।

गंगाघाट थाना क्षेत्र के ऋषि नगर में 13 साल की अंशिका और उसके ढाई साल के बेटे राघव की गर्दन रेतकर की गई नृशंस हत्या में पुलिस ने उसके मौसेरे भाई गोलू और एक अन्य सीताराम कालानी निवासी राहुल यादव को हत्यारोपित बताया। गोलू को तो गिरफ्तार कर जेल भेजा गया पर राहुल नहीं मिला। हत्या के बाद जांच करने गई पुलिस को पड़ोसी युवक ने तीन युवकों के बच्चों के घर आने की जानकारी दी। अगले दिन दो को ही आरोपित बनाया गया तो बच्चों की मां मोनू मिश्र के जेहन में पुलिस के छवि को लेकर सवाल उठ खड़े हुए। उसने तीसरे आरोपित को न पकड़े जाने की मांग की तो पुलिस ने दूसरे के साथ तीसरे आरोपित अगेहरा गांव निवासी सनी कुमार पुत्र महेश धानुक को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जिस आरोपित को पुलिस कल तक निर्दोष बता रही थी, विरोध होने पर कातिल करार दे दिया। रविवार को सनी और राहुल को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। इसी तरह माखी पुलिस ने बच्चे की बलि के मामले में 10 में पांच को आरोपित बनाया तो परिजनों ने पुलिस कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर एसपी आवास का घेराव किया।

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पुलिस बोली, तीसरे हत्यारोपित ने खरीदी थी चाकू

- गंगाघाट एसओ हरप्रसाद अहरवार ने हत्या के बाद तीसरे आरोपित सनी को निर्दोष करार देते हुए बताया था कि वह अजनाने में गोलू और राहुल के साथ बच्चों के घर पहुंचा पर जब उसे दोनों का उद्देश्य पता चला तो उसने हत्या से इन्कार कर दिया और वहां से निकल गया। बच्चे की मां के विरोध दर्ज कराने पर पुलिस ने तीसरे आरोपित को अब गुनहगार बताते हुए कहा कि सनी कानपुर के एक होटल में काम करता है। उसने छह चाकू खरीदी। तीन होटल पर रख आया, जबकि तीन में एक गोलू दूसरी राहुल और तीसरी खुद लेकर बच्चों के घर पहुंच गया। पुलिस की बदली कहानी से यह साफ है कि जघन्य वारदातों में भी पुलिस खेल से नहीं चूकती।

Posted By: Jagran