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Lucknow–Kanpur Expressway की बदहाली, लखनऊ की लेन पर 22 दिन से नहीं दौड़े भारी वाहन, फिर भी 25 किमी में सड़क बनी नाली

Published: Wed, 26 Aug 2026 07:16 PM (IST)

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उन्नाव से लखनऊ लेन पर भारी वाहनों पर रोक के बावजूद 22 दिन में 25 किमी सड़क ...और पढ़ें

कानपुर से लखनऊ लेन में किमी 39.1 के पास सड़क पर बनी नाली में भरा बारिश का पानी। जागरण

कानपुर से लखनऊ लेन में किमी 39.1 के पास सड़क पर बनी नाली में भरा बारिश का पानी। जागरण

HighLights

  1. पांच अगस्त को एक्सप्रेसवे पर आजाद मार्ग, कोरारी व बनी टोल से भारी वाहनों के प्रवेश पर लगाई गई थी रोक

  2. उन्नाव से लखनऊ लेन के कुल 45 किमी की आखिरी 100 किमी गति वाली एक ओर की सड़क की स्थिति बेहद खराब

  3. मरम्मत जारी, लेकिन कई जगह जलभराव और घास की समस्या, पांच अगस्त को ही मरम्मत पूरी होने तक टोल फ्री किया गया था एक्सप्रेसवे

जागरण संवाददाता, उन्नाव। Lucknow–Kanpur Expressway: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उन्नाव से लखनऊ लेन पर बीते 22 दिन से भारी वाहन नहीं गुजर रहे हैं, फिर भी 25 किमी तक सड़क इस तरह दबी है कि यहां तीन मीटर चौड़ी नाली बन गई है। उन्नाव से लखनऊ लेन के कुल 45 किमी की आखिरी 100 किमी गति वाली एक ओर की सड़क की स्थिति बेहद खराब है।

सड़क दबने की यह समस्या अलग-अलग स्थानों पर है। जिसमें गांव आटा के पास किमी 63 से अचलगंज गांव के निकट किमी 62.2 तक, अड़ेरुवा गांव के निकट किमी 61 से बड़ौरा गांव के निकट किमी 56 तक, दुवा गांव के पास किमी 55 से तौरा गांव के निकट कमी 52 तक, चमरौली गांव के निकट किमी 49 से गांव नेवलगंज के किमी 45.1 तक, सोहरामऊ गांव के पास किमी 42.8 से 42 तक, गांव आशाखेड़ा के निकट किमी 41.7 से 40 तक, किमी 39 से 37 तक गांव कुसुंभी आदि स्थानों पर बनी तक यह लेन कई कई किमी तक दबकर पगडंडी बनी है। मोइद्दीनपुर गांव के पास किमी 70.1 से लेकर पड़री के झब्बाखेड़ा के सामने किमी 55.2 तक जगह-जगह समस्या है।

Lucknow Kanpur Expressway

कानपुर से लखनऊ की लेन पर किमी 41.3 के पास भरा बारिश का पानी। जागरण


मार्ग मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली पर रोक के साथ पांच अगस्त से आजाद मार्ग टोल प्लाजा से भारी वाहनों का जाना रोका गया था। वाहनों को रोकने के लिए टोल कर्मियों ने भारी बोल्डर लगाकर सिर्फ कार गुजर सकने का ही स्थान छोड़ा हुआ है। भारी वाहनों के प्रवेश पर पांबदी के लिए उन्नाव के आजाद मार्ग, कोरारी टोल के अलावा लखनऊ में बनी टोल पर बोल्डर लगा दिए गए थे। जो अब भी लगे हैं। जिससे भारी वाहनों लखनऊ जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद है।

एक्सप्रेसवे का निर्माण एकमात्र एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक ने करवाया है। मार्ग का संचालन 14 जुलाई को सुबह आठ बजे से हुआ था। वहीं पांच अगस्त को भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगने से पहले तक एक्सप्रेसवे पर उन्नाव से लखनऊ की ओर लगभग 70 प्रतिशत तो लखनऊ से उन्नाव लेन पर 30 प्रतिशत वाहनों का आवागमन हो चुका है। वहीं कानपुर से लखनऊ लेन पर ग्रीन फील्ड एरिया में सड़क किनारे तक बड़ी-बड़ी घास भी निर्माण एजेंसी की लापरवाही उजागर कर रही है।

गांव नेवरना के निकट यह समस्या किमी 57 पर ज्यादा दिख रही है। जहां सड़क किनारे पर खड़ी बड़ी बड़ी घास अब सड़क तक आ रही है। इसके अलावा कानपुर-लखनऊ लेन पर पड़री के झाऊ खेड़ा निकट किमी 51.2 (लोकार्पण स्थल) के पास ग्रामीणों द्वार तोड़ी गई जाली गिरी पड़ी है। जिससे मवेशी आसानी से एक्सप्रेसवे पर आ रहे हैं।

कानपुर से लखनऊ लेन पर आशाखेड़ा गांव निकट किमी 41.3 पर दबकर नाली बनी सड़क पर ताजा हुई वर्षा का पानी भरा है। इसी लेन पर गांव कुसुंभी के निकट किमी 39.1 पर सड़क दबने पर बनी नाली में बारिश का पानी भरा हुआ है। पीएनसी के मैनेजर सत्य नारायण ने बताया कि एक्सप्रेसवे के किनारे घास की सफाई, मिट्टी भराई के साथ मार्ग पर मरम्मत के काम किए जा रहे हैं। मार्ग पर यातायात निर्बाध गति से दौड़ रहा है।

लखनऊ से उन्नाव लेन पर भी दबकर नाली बनी सड़क

लखनऊ से उन्नाव लेन पर भी 45 किमी में लगभग चार किमी सड़क दबकर नाली बनी है। यह खामी भवानी खेड़ा गांव के निकट किमी 43 से से किमी 44.3 गांव जगेथा तक, अमरसस गांव से 45 से 45.9 तक कुशराजपुर तक, नेवरना गांव के निकट किमी 46.3 से तिवारी खेड़ा गावं के पास तक किमी 46.8 तक मार्ग दबा है। जहां नालियां बन चुकी हैं और बरसात का पानी अच्छी खासी मात्रा में भरता है।

 

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