विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कुलदीप सेंगर के कट्टर समर्थक धीरेंद्र प्रताप सिंह की लखनऊ में हत्या, माखी दुष्कर्म पीड़िता के चाचा के मामले पर दिए गए थे दो गनर

Published: Sun, 30 Aug 2026 08:41 PM (IST)

लखनऊ में महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या से सनसनी फैल गई। वह माखी दुष्कर्मकांड ...और पढ़ें

News Article Hero Image

HighLights

  1. धीरेंद्र प्रताप सिंह, कुलदीप सेंगर के कट्टर समर्थक, की लखनऊ में हत्या

  2. माखी दुष्कर्म पीड़िता के चाचा पर मुकदमे में धीरेंद्र गवाह थे

  3. इसी आधार पर धीरेंद्र को शासन की स्वीकृति से मिले दो गनर

जागरण संवाददाता, उन्नाव। लखनऊ के महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या के बाद सनसनी फैल गई। धीरेंद्र मूल रूप से फतेहपुर चौरासी के राजेपुर गांव के रहने वाले हैं। पिता कल्लू किसान हैं। धीरेंद्र माखी दुष्कर्मकांड में तिहाड़ जेल में बंद सजायाफ्ता पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर के कट्टर समर्थक थे।

दूसरे समर्थक मौजूदा समय में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष नवाबगंज निवासी अरुण सिंहद्वारा वर्ष 2017 में माखी दुष्कर्म पीड़िता के चाचा पर वसूली का मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसमें धीरेंद्र सिंह व एक अन्य गवाह थे।इसी आधार पर शासन की स्वीकृति पर धीरेंद्र सिंह को पुलिस की ओर से दो गनर दिए गए थे।

धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या से गांव में शोक की लहर है। स्वजन ने बताया कि लगभग 10 वर्ष पहले धीरेंद्र ने लखनऊ में मकान बनवाया और वहीं परिवार के साथ रहने लगे थे। धीरेंद्र प्रताप गुमशुदगी की सूचना पर रविवार सुबह उनके भाई अवधेश प्रताप व बउवा सिंह गांव से लखनऊ निकल गए थे।

धीरेंद्र प्रताप लखनऊ में जिस महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष थे, उसके कई सदस्य राजनैतिक लोग थे। चार वर्ष पूर्व धीरेंद्र का विवाह ममता से हुआ था। धीरेंद्र सिंह का संपर्क प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री, मंत्री व कई विधायकों के अलावा आइएएस व आइपीएस अधिकारियों से था।

फर्श से अर्श तक की कहानी


ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2002 में ही धीरेंद्र घर से बाहर चले गए थे। वहीं रहकर पढ़ाई करते थे। इसके बाद धीरे-धीरे राजनीतिक लोगों से संपर्क किया। सबसे पहले पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर के संपर्क में आए और उनके कट्टर समर्थक बन गए। जमीन की खरीद फरोख्त के साथ जमीन संबंधी मुकदमों को सुलझाने में भी वह चर्चा में रहे। नेताओं के संपर्क में आने से वह लगभग 10 वर्षों से राजनीति में सक्रिय थे। लखनऊ में रहने का ठिकाना बनाने के साथ गांव में जमीन खरीदी। परिवार की दयनीय स्थित धीरे-धीरे सुधरने लगी। मौजूदा समय गांव में 10 से 12 बीघे जमीन है।

वहीं गांव में जो मकान बना है वह भी बेहद आलीशान है। उनके पास दो फार्च्यूनर कार भी हैं। गांव में घर के पास ही मां दुर्गा का मंदिर बना है। जोकि पूर्व में काफी जर्जर हो चुका था। जब धीरेंद्र की आर्थिक स्थिति अच्छी हुई और संपन्नता आई तो उन्होंने मां दुर्गा के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। वर्ष 2024 में राजेपुर गांव में भाई अवधेश सिंह का तिलक था। उसमें सीओ स्तर के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, कैबिनेट मंत्री श्रम विभाग अनिल राजभर, अमेठी के गौरीगंज विधायक राकेश सिंह, अयोध्या के गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह, के अलावा सदर के सभी विधायक कार्यक्रम में शामिल होने गांव पहुंचे थे। कई जिलों के एसडीएम सीओ समेत अन्य अधिकारी भी कार्यक्रम का हिस्सा बने थे।


लखनऊ से महीने में दो से तीन बार आते थे गांव

धीरेंद्र प्रताप सिंह माह में दो से तीन बार गांव जरूर आते थे। ग्रामीणों से मिलते थे साथ ही जो भी समस्याएं होती थी उनको भी निस्तारित कराते थे। फिर गांव में एक दिन रुकते भी थे। बांगरमऊ की एक जमीन विवाद को भी हत्या से जोड़ा जा रहा है।

घर पर पिता और भाई के कंधे पर था भार

गांव में जो जमीन है, उसकी देखरेख पिता कौशल किशोर सिंह सहित दो भाई अवधेश सिंह और बउवा सिंह करते है। धीरेंद्र तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े थे। मां नन्ही सिंह, बहन शुभा सिंह का रो रोकर बुरा हाल है। एक भाई व बहन अविवाहित है। धीरेंद्र की हत्या की बात पता चलते ही गांव से बड़ी संख्या में लाेग लखनऊ पहुंचे हैं।