गंगा एक्सप्रेसवे: उन्नाव के सोनिक इंटरचेंज में जलभराव मामले में खुलासा, हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई में मिली बड़ी हेराफेरी
गंगा एक्सप्रेसवे के सोनिक इंटरचेंज पर जलभराव की समस्या का कारण हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई में हेराफेरी निकली। सीईओ मनोज ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
सोनिक इंटरचेंज पर जलभराव, हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई में हेराफेरी उजागर।
सीईओ मनोज कुमार सिंह ने विद्युत विभाग, यूपीडा अधिकारियों को चेताया।
हाईटेंशन लाइन को पांच मीटर ऊंचा करने के निर्देश दिए गए।
जागरण संवाददाता, उन्नाव। गंगा एक्सप्रेसवे के सोनिक इंटरचेंज (रैंप) पर टोल बूथ के पास तीसरे दिन भी पानी भरा रहा। इस बीच दोपहर 2:30 बजे के करीब स्टेट ट्रांसफार्मेशन कमीशन (एसटीसी) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार सिंह पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई में बड़े पैमाने पर की गई हेराफेरी उजागर हुई।
इस पर सीईओ ने विद्युत ट्रांसमिशन विभाग, यूपीडा विद्युत विंग और इंजीनियर को शासन स्तर सेकार्रवाई की चेतावनी दी। दरअसल, सोनिक इंटरचेंज के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन की ऊंचाई नियमों के अनुसार कम से कम 20 मीटर होनी चाहिए थी। निर्माण के दौरान विभागीय मिलीभगत से एक तरफ का टावर तो ऊंचा कर दिया गया, लेकिन इंटरचेंज की ओर लाइन की ऊंचाई को कागजों में 14 मीटर दर्शाकर ही नक्शा पास करा दिया गया।
सीईओ ने पैमाइश कराई तो वास्तविक ऊंचाई महज 12 मीटर ही निकली। हाईटेंशन लाइन कम ऊंची होने के कारण ही एक्सप्रेसवे की सड़क को गहराई में बनाना पड़ा, जो अब बारिश में झील बन गई है। रैंप का स्तर समुद्र तल से 127 मीटर होना चाहिए था, लेकिन इसे करीब 124 मीटर पर बनाया गया।
सीईओ ने यूपीडा के स्वतंत्र इंजीनियर अमरेंद्र बहादुर सिंह, महाप्रबंधक (विद्युत) अरुण पाठक और ट्रांसमिशन के एक्सईएन एके पाठक को फटकार लगाते हुए लाइन को तत्काल पांच मीटर और ऊंचा करने के निर्देश दिए, ताकि सड़क की ऊंचाई बढ़ाई जा सके। निर्माण एजेंसी पटेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट मैनेजर आरएस मिश्रा ने बताया कि नक्शे के मुताबिक एक्सप्रेसवे का निर्माण कराया गया है।
हाईटेंशन लाइन के संबंध में सितंबर, 2023 में संबंधित विभाग को लिखित जानकारी दी गई थी पर विद्युत विभाग ने शिफ्टिंग ठीक से नहीं की। इसलिए टोल मार्ग की ऊंचाई कम करनी पड़ी। विद्युत विभाग हाईटेंशन लाइन ऊंची कर देगा तो टोल रोड की ऊंचाई भी बढ़ा दी जाएगी।
अभियंत्रण कंपनी को उठाना होगा खर्च
यूपीडा के अधिकारियों ने बताया कि रैंप की डिजाइन और ड्राइंग को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी स्वतंत्र अभियंत्रण कंपनी की थी। डिजाइन में बदलाव की जानकारी यूपीडा को नहीं दी गई थी। अब इस बात की भी जांच की जाएगी कि रैंप के डिजाइन में बदलाव की जानकारी यूपीडा को क्यों नहीं दी गई। वहीं, रैंप को निर्धारित स्तर पर लाने में होने वाला खर्च स्वतंत्र अभियंत्रण कंपनी को उठाना होगा।
खेतों में पानी पहुंचा तो किसान विरोध पर उतरे
उधर, पानी रोकने के लिए जगह-जगह बनाए गए अस्थायी बंधे से मुर्तजानगर के खेतों में पानी भर गया, जिसके विरोध में किसान टोल पर पहुंच गए। निर्माण एजेंसी ने देर शाम तक बंधा हटाने का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त जलभराव से टोल क्षेत्र की स्ट्रीट लाइटों की वायरिंग भी जल गई, जिसे ठीक कराया जा रहा है।
