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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के बाद अब गंगा एक्सप्रेसवे में खामी, 5 मीटर सड़क धंसने के बाद अब 6 जगह और धंसी

Published: Tue, 18 Aug 2026 03:43 PM (IST)

गंगा एक्सप्रेसवे पर लगातार तीसरे दिन सड़क धंसने की समस्या सामने आई है। 13 किलोमीटर के दायरे में छह जगह ...और पढ़ें

गंगा एक्सप्रेसवे मार्ग पर गांव बशीरतगंज के निकट किमी 422 पर दोबारा आई धंसने की समस्या के बाद की जाती मरम्मत। जागरण

गंगा एक्सप्रेसवे मार्ग पर गांव बशीरतगंज के निकट किमी 422 पर दोबारा आई धंसने की समस्या के बाद की जाती मरम्मत। जागरण

HighLights

  1. लगातार तीसरे दिन गंगा एक्सप्रेसवे मार्ग पर आई धंसने की खामी 

  2. एक्सप्रेसवे मार्ग के किनारे की सड़क में आई है धंसने की समस्या

  3. दर्जनों जगह ढलान की मिट्टी बही, नालियां भी टूटीं

जागरण टीम, उन्नाव। लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे की खामियां अभी थमीं नहीं थी कि गंगा एक्सप्रेसवे धंसने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे पर लगातार तीसरे दिन सड़क धंसने की समस्या सामने आई है। पहले पांच मीटर सड़क धंसी। अब 13 किलोमीटर के दायरे में छह जगह किनारे की सड़क धंसी मिली है। इससे एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे मुख्य मार्ग पर मंगलवार को 13 किमी के दायरे में आधा दर्जन स्थानों पर सड़क धंसने की समस्या पाई गई। मंगलवार को सड़क धंसने की समस्या के साथ अब तक लगातार तीसरे दिन तक जहां एक्सप्रेसवे आठ स्थानों पर धंस चुका है। वहीं गांव सरांय कटियान निकट किमी 421 पर रविवार को व बशीरतगंज गांव के पास किमी 422 के बीच सोमवार को ही रोड धंसी थी। जिस पर ओवर लैपिंग कर डामर का पैच वर्क किया गया था। मंगलवार को इसी स्थान पर मार्ग दोबारा धंस गया और दरारें आ गईं।

तेज बारिश में यहां धंसा एक्सप्रेसवे

मंगलवार सुबह हुई तेज बारिश में गंगा एक्सप्रेसवे पर गांव बशीरतगंज निकट किमी 421, सरांय कटियान निकट किमी 422, दरोगा खेड़ा गांव निकट किमी 423 ओरहर गांव निकट किमी 431, रायपुर गांव के पास किमी 432 व खंभार खेड़ा गांव निकट किमी 433 पर सड़क किनारे पर धंस गई है। जहां सड़क धंसी है वहीं ढलान की मिट्टी भी धंसी है।

कई जगह नालियां टूटीं

बशीरतगंज टोल से एक्सप्रेस वे पर जाने वाली रोड की मरम्मत एक हफ्ते पहले हुई थी। वहीं एक साथ मार्ग धंसने के बाद बरसात रुकते ही निर्माण एजेंसी की गाड़ियां मजदूरों के साथ मौके पर पहुंची और मरम्मत कार्य शुरू कर दिया। बशीरतगंज के आसपास दर्जनों जगह ऐसी है जहां नालियां टूट चुकी हैं। कंक्रीट की ढलान में दरारें आ चुकी है।

कई बार मरम्मत के बावजूद धंस गई रोड

गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण में कार्यदाई संस्था पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर की खराब इंजीनियरिंग का परिणाम अब लगातार देखने को मिल रहा है। कई बार मरम्मत के बावजूद रोड और ढलान की मिट्टी धंसने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। जो फिर दरक गई। 421 पर सोमवार को जहां रोड धंसी थी और ढलान की मिट्टी नाली बह गई थी। मंगलवार को उसके बगल मे नाली और कंक्रीट की ढलान करीब 300 मीटर दरक गई। जो किस समय ढह जाएगा कहना मुश्किल है।

संवेदनशील हिस्सों की निगरानी कर रही कंपनी

प्रोजेक्ट मैनेजर आरके मिश्रा ने बताया कि बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे के संवेदनशील हिस्सों की लगातार निगरानी की जा रही है। जहां भी सड़क के किसी हिस्से में समस्या सामने आती है, वहां टीमों को तत्काल भेजकर आवश्यक सुधार कार्य कराया जा रहा है। बारिश के मौसम को देखते हुए एक्सप्रेसवे की नियमित पेट्रोलिंग और तकनीकी निरीक्षण बढ़ाया गया है। टीमों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुगम सफर उपलब्ध कराया जा सके।

नाले के पास मिट्टी भराकर भूली गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण एजेंसी

गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान डंपरों की निकासी के लिए निहालपुर-भदनी नाले की पुलिया के पास मिट्टी भरकर बनाए गए रास्ते से जलनिकासी बाधित हो गई। वर्षा के दौरान पानी न निकलने से करीब दो हजार बीघा धान की फसल जलमग्न हो गई। किसानों ने तहसीलदार अशोक कुमार शुक्ला से शिकायत कर मौके की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।

तहसीलदार को दी शिकायत

सफीपुर तहसील क्षेत्र के बृजपालपुर, भैंसहरा, मवई लाल, मवईभान समेत कई गांवों के किसानों ने तहसीलदार को दिए शिकायती पत्र में बताया कि क्षेत्र का पानी निहालपुर से होकर भदनी झाल तक जाने वाले नाले से निकलता है। करीब एक वर्ष पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए क्षेत्र से मिट्टी ले जाने वाले डंपरों के आवागमन को निहालपुर के पास नाले की पुलिया के समीप मिट्टी भरकर रास्ता बना दिया गया था। निर्माण कार्य समाप्त होने के बाद भी रास्ते में भरी मिट्टी नहीं हटाई गई। किसानों ने बताया कि नहर विभाग ने माइनर की सफाई तो कराई, लेकिन नाले में जमा मिट्टी नहीं हटाई गई। इससे बारिश का पानी नाले से होकर नहीं निकल सका और करीब दो हजार बीघा में बोई धान की फसल पानी में डूब गई।

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गंगा एक्सप्रेसवे पर गांव बशीरतगंज के निकट किमी 421 पर सड़क धंसने के बाद मरम्मत में जुटे कर्मचारी। जागरण

सबसे पहले यहां मिली थी खामी

पहले किमी 422 पर पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरार के बाद ओवरलैपिंग की गई थी। फिर सोमवार को किमी 421 पर बशीरतगंज गांव के पास ढलान की मिट्टी धंसने से करीब पांच मीटर सड़क बैठ गई। इससे पहले रविवार को गांव सरांय कटियान के पास किमी 422 पर गंगा एक्सप्रेसवे के नहर पुल का एक्सपेंशन ज्वाइंट फट गया था। पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट के किनारे-किनारे आई दरार को पाटने के लिए निर्माण एजेंसी पटेल इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस पूरे स्थान पर 100 मीटर तक डामर की नई परत बिछाकर ओवर लैपिंग की थी।

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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उन्नाव से लखनऊ लेन पर रखे निर्माण साम्रगी को हटाते श्रमिक । जागरण

इधर, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की 37 किमी सड़क जगह-जगह धंसकर बनी नाली

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ग्रीनफील्ड हिस्से के 45 किमी क्षेत्र में लखनऊ की ओर जाने पर 37 किमी सड़क की दो लेन पर लंबी-लंबी नालियां बन गई हैं। बारिश होते ही इनमें पानी भर जाता है और इसे निर्माण एजेंसी के श्रमिक कई बार हटाते दिखते हैं। यह समस्या दूर करने के लिए निर्माण एजेंसी पीएनसी इन्फ्राटेक ने कई जगह पैचवर्क कराया है, लेकिन दोबारा सड़क धंस रही है। मंगलवार को शायद पहला ऐसा दिन था जब सड़क पर कहीं मरम्मत नहीं चल रही थी। हालांकि लखनऊ से उन्नाव की ओर गांव नेवलगंज से नेवरना के बीच पानी निकासी सुनिश्चित करने के लिए नालियां तोड़ी जा रही हैं। परियोजना निदेशक एनएचएआइ नवरत्न ने बताया कि मार्ग की मरम्मत कराई जा चुकी है। अब कोई समस्या नहीं है।

उन्नाव से बनी तक पाई जा रही बड़ी खामियां

उन्नाव से लखनऊ तक बना छह लेन का एक्सप्रेसवे 63 किमी लंबा है। इसमें उन्नाव सीमा तक 45 किमी हिस्सा ग्रीनफील्ड है, जबकि लखनऊ के हिस्से में 18 किमी एलीवेटेड है। इसका उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। तब से 35 दिन में 122 पैबंद लग चुके हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत उन्नाव से लखनऊ की ओर जाने पर है। इसी लेन पर आटा गांव के पास किमी 63 से अचलगंज गांव के निकट किमी 62.2 तक, अड़ेरुवा के निकट किमी 61 से बड़ौरा के निकट किमी 56 तक, दुवा गांव के पास किमी 55 से तौरा गांव के निकट कमी 52 तक, चमरौली गांव के निकट किमी 49 से गांव नेवलगंज के किमी 45.1 तक, सोहरामऊ गांव के पास किमी 42.8 से 42 तक, गांव आशाखेड़ा के निकट किमी 41.7 से 40 तक, किमी 39 से 37 तक गांव कुसुंभी और आगे बनी तक यह लेन कई-कई किमी तक धंस गई है। डिवाइडर की ओर वाली लेन ऊंचाई में होने की वजह से सुरक्षित है। वहीं, लखनऊ-उन्नाव लेन पर भवानी खेड़ा गांव के निकट किमी 43 से किमी 44.3 गांव जगेथा तक, अमरसस गांव से 45 से 45.9 तक कुशराजपुर तक, नेवरना गांव के निकट किमी 46.3 से तिवारी खेड़ा गावं के पास तक किमी 46.8 तक एक्सप्रेसवे धंसा है। यहां नालियां बन चुकी हैं।

अन्य खामियां भी आ रहीं

एक्सप्रेसवे पर किए गए सीमेंटेड निर्माण भी टूट रहे हैं। पुलिया की दीवारें फट चुकी हैं। डिवाइडरों में दरारें आ रही हैं, नीचे गड्ढे और सड़क धंस रही है। डिवाइडर के ऊपर लगाई गई एंटी-ग्लेयर डिवाइस भी कई स्थानों पर टूटकर गायब हो चुकी है। यह डिवाइस दूसरी ओर से आ रहे वाहन की रोशनी से वाहन सवारों को बचाती है।

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