जागरण संवाददाता, उन्नाव : मौसम में परिवर्तन के साथ ही एक बार फिर वायरल बीमारियों का हमला तेज हो गया है। सुबह शाम हो रही ठंड बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा है। इनकी सेहत को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी होगी वर्ना गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। इस मौसम में डायरिया और वायरल बुखार और हार्टअटैक का खतरा होने की सबसे अधिक संभावना रहती है।

फरवरी के दूसरे पखवारे से ही मौसम में तेजी के साथ परिवर्तन होने लगा है। मौसम में उतार-चढ़ाव से बच्चों और बुजुर्गों को वायरल बीमारियां भी तेजी से जकड़ने लगी हैं। बच्चों को डायरिया, वायरल फीवर, निमोनिया का खतरा है। बुजुर्गों को सबसे अधिक खतरा एलर्जिक ब्रोंकाइटिस (सांस फूलने की बीमारी) का है। दरअसल मौसम में दिन में गर्मी आ गई है। चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. शोभित और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रज कुमार का कहना है कि सुबह शाम अब भी ठंड हो रही है। दिन में गर्मी रहती है इससे लोग ठंड से बचाव में लापरवाही करने लगे हैं यही कारण है कि बच्चे और बुजुर्ग बीमारी की चपेट में अधिक आ रहे हैं।

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बुजुर्गों को एलर्जिक ब्रोंकाइटिस से खतरा

- जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आलोक पांडेय ने कहा कि इस मौसम में एलर्जिक ब्रोंकाइटिस, वायरल बुखार का खतरा बढ़ गया है। इसमें मरीज को पहले बुखार होता है। फिर खांसी और सांस की परेशानी होने लगती हैं। फेफड़ों की नली में सूजन आ जाती है जिससे सांस लेने में परेशानी होती है कभी भी हार्ट पर अधिक लोड पड़ने से मौत तक हो जाती है।

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बच्चों में वायरल इंफेक्शन का खतरा अधिक

- बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित श्रीवास्तव ने कहा कि बदलते मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। इस मौसम में वायरल इंफेक्शन का खतरा अधिक होता है। बच्चों में वायरल फीवर, निमोनिया, सर्दी, खांसी, जुकाम आदि की शिकायत होती है।

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ऐसे करें बचाव

- बच्चों को सुबह शाम फुल अस्तीन के ऊनी कपड़ा पहनाकर रखें, रात में पंखा कूलर आदि न चलाएं।

- हर बार दूध देने से पहले बोतल कम से कम पांच मिनट तक पानी में खौलाए।

- पानी में बच्चों को न खेलने दें और ठंडी चीजें खाने को न दें, दूध भी गुनगुना करके दें।

- बुजुर्ग सुबह जल्दी बाहर टहलने न निकले, हलकी धूप के बाद हल्का ऊनी कपड़ा पहनकर निकलें।

- जब बहार टहलने निकले तो जहां तक संभव हो मास्क लगा लें। धूल और धुआं से बचकर रहे इससे फेफड़ों में संक्रमण की संभावना कम होगी।

- हृदय और उच्च रक्तचाप वाले मरीज विशेष सर्तक रहें समय से दवा ले सांस लेने में परेशानी पर डॉक्टर की सलाह लें।

Posted By: Jagran

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