यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 08, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बिल्लेश्वर मंदिर के तालाब को भागीरथ का इंतजार
पुरवा: पुरवा में लगभग 2800 से अधिक जलाशय मौजूद होने के बाद भी खुशहाली रूठी है। ऐसे ही पुरवा के द्वाप

पुरवा: पुरवा में लगभग 2800 से अधिक जलाशय मौजूद होने के बाद भी खुशहाली रूठी है। ऐसे ही पुरवा के द्वापर कालीन बिल्लेश्वर महादेव मंदिर का तालाब भी उपेक्षा का शिकार बन चुका है। यहां तालाब के पानी में पक्षियों का कलरव सुनने के लिए किसी भागीरथ का इंतजार है। इंसान से लेकर भगवान तक के लिए तालाब कभी सूखे जैसी स्थित से उबारने के लिए आपदा प्रबंधन का काम करते थे। बिना भेदभाव के जाति धर्म से दूर होकर एक साथ डुबकियां मार कर सामाजिक समरसता का संदेश देने तो कभी जीव जंतुओं और पशु पक्षियों की प्यास बुझाने के साथ साथ धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयोगी बनते आये हैं। ¨कतु शासन इनकी उपयोगिताओ से शायद संतुष्ट नही है। इससे इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। पुरवा तहसील क्षेत्र में 1800 से अधिक छोटे बड़े तालाब हैं इनमें तमाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं, लेकिन उनका स्वरूप तालाब जैसा ही है।
श्रीकृष्ण की प्यास अर्जुन ने बुझाई थी प्यास
किदवंती है कि मौरावां के राजा मौरवध्वज से मिलने जा रहे श्रीकृष्ण ने अर्जुन के साथ यहां रात्रि विश्राम किया था। प्यास लगने पर अर्जुन से जल की व्यवस्था करने को कहा, तो अर्जुन ने धरती में तीर मारकर जलस्त्रोत निकाला था और जल बर्बाद न हो इसके लिए धनुष रख दिया था। जो कालांतर में धनुषाकार तालाब में तब्दील हो गया। बाद में श्री कृष्ण ने मिट्टी का शिव¨लग बनाकर इसी तालाब के जल से अभिषेक किया था। इसकी खोज बंजारों ने बिल्लेश्वर महादेव के रूप में की। कालांतर से ही तालाब के जल से शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा रही, पर उसके सूखने से अब कुएं के जल से शिव¨लग पर जलाभिषेक हो रहा।
कभी सुनने को मिलता था कलरव
मंदिर के पुजारी महेश बाबा बताते हैं कि तालाब सूख जाने पर भक्तों के प्रयास से नहर के पानी से उसको भरा जाता है। किन्तु नहरें भी सूखी होने के कारण यहां भी सूखा पड़ा है। यहां कभी पहले तालाब में पक्षियों के कलरव से सुबह शाम आनंदित होते थे। भक्त नहाने के अलावा तैराकी का आनंद उठाते थे। हर हर बम बम के साथ जलाभिषेक करते थे। लेकिन जैसे जैसे तालाब खराब हुआ तो सब कुछ बदल गया। भक्तों की मांग पर एक वर्ष पहले शासन ने तालाब के जीर्णोंद्धार के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत किए पर उससे केवल सीढि़यों पर टाइल्स और और बारादरी बनवा कर छोड़ दिया गया।