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ग्रीन कार्बन क्रेडिट योजना से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, सुलतानपुर में स्कीम से जुड़े 1000 किसान

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:20 PM (IST)

वन विभाग ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए सुलतानपुर में ग्रीन कार्बन क्रेडिट योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 1000 से अधिक किसानों ने पंजीकरण कराया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. वन विभाग ने किसानों की आय बढ़ाने को योजना शुरू की।

  2. सुलतानपुर में 1000 से अधिक किसानों ने कराया पंजीकरण।

  3. 5 साल बाद प्रति पौधा 500 रुपये और मालिकाना हक।

संवाद सूत्र, सुलतानपुर। वन विभाग ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए ग्रीन कार्बन क्रेडिट योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत पौधारोपण करने वाले किसानों का पंजीयन किया जा रहा है। जो वर्तमान के साथ बीते वर्ष पौधारोपण महा अभियान में पौधों का रोपण कर चुके हैं। अब तक एक हजार से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है।

किसानों की ओर से रोपे गए पौधों का द इनर्जी एंड रिर्सोसेज इंस्टीटयूट की ओर से सर्वे किया जा रहा है। पौधों का सर्वे होने के बाद किसानों को पांच वर्ष तक इन पौधों का संरक्षण करना होगा। इस अवधि के बाद किसानों को पौधों पर मालिकाना हक के साथ 500 रुपये प्रति पौध के हिसाब से डबल लाभ होगा।

सदर, कादीपुर, जयसिंहपुर, लम्भुआ रेंज में रेंजर किसानों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। चारों रेंज में अब तक एक हजार से अधिक किसानों का पंजीयन किया गया है।

योजना का धरातल पर क्रियांवयन से एक ओर जहां धरती पर हरियाली दिखेगी, वहीं किसानों की माली हालत में सुधार होगा। किसान इस योजना से जुड़ने के लिए क्षेत्रीय वनाधिकारी या प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से योजना की विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

किसानों के हितकर है योजना

योजना में पंजीयन कराने वाले चांदा छतौनाकला के किसान सजन कुमार, महेसुआ के हरिपूजन सिंह, माधवपुर के लाल बहादुर सिंह, भपटा के धर्मेद्र सिंह, सिप्तापुर के शंकर विश्वकर्मा ने बताया कि ग्रीन कार्बन क्रेडिट योजना किसानों के लिए हितकारी है। कहा कि पांच वर्ष तक पौधों को संरक्षित करने के बाद किसानों को डबल लाभ होगा। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

ग्रीन कार्बन क्रेडिट योजना से जुड़ने वाले किसान दोगुणा लाभ कमाएंगे। किसान जो पौध रोपेंगे, उस पर उनका मालिकाना हक होगा। इसके साथ ही प्रति पौध के हिसाब से नकद धनराशि भी मिलेगी। पंजीयन के लिए किसान को खसरा, खतौनी, नाम, पता, मोबाइल नंबर, बैंक का नाम, पासबुक की छाया प्रति और पैनकार्ड देना होगा। जिससे उनके खाते में योजना से संबंधित धनराशि भेजी जा सके। -अमित सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी।

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