योगेश यादव, दूबेपुर (सुलतानपुर): सिखा देती हैं चलना ठोकरें भी राहगीरों को, कोई रास्ता सदा दुश्वार हो ऐसा नहीं होता..मशहूर शायर निदा फाजली की यह लाइन दूबेपुर विकास खंड के भाईं गांव की रहने वाली रिशा वर्मा पर सटीक बैठती है। वह कहती हैं कि हालात के मारे लोगों को ही इनका दर्द बाखूबी पता होता है। सामाजिक तिरस्कार, अक्षमता से जूझती दिव्यांग रिशा ने दिव्यांगों की मदद के लिए 2001 से खुद को समर्पित कर दिया है। उनके बेहतर प्रयासों से निकल रहे सार्थक परिणाम दिव्यांगों को नई ऊर्जा दे रहे हैं। मेहनत का नतीजा यह है कि अब तक वह आठ लोगों को जीवन की मुख्य धारा से जोड़ चुकी हैं। रिशा एक पैर से दिव्यांग हैं। गांव-समाज के लिए कुछ बेहतर करने की इच्छा रखने वाली रिशा को ग्रामीणों ने सन 1995 में गांव का मुखिया चुन लिया। विकास कार्याें से लेकर हर तबके की सेवा करने में मशगूल रिशा ने पयागीपुर में रूरल इंफारमेटिव एंड सोशल हारमोनी एकेडमी खोल ली। उनकी एकेडमी में मानसिक रूप से कमजोर कुल 45 सदस्य हैं। यहां इन्हें दवा से लेकर रहने, खाने तक की पूरी व्यवस्था मुहैया कराई जाती जाती है। वाराणसी के मनो चिकित्सक डॉ. अखिलेश द्वारा मानसिक रूप से कमजोर लोगों का इलाज भी किया जाता है। दूबेपुर व जयसिंहपुर के दो मेडिकल स्टोर संचालकों की तरफ से उधार व रियायत दर पर मरीजों को दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती है।

---- मुख्यमंत्री कर चुके हैं सम्मानित

रिशा के लगन व कार्य को देखकर तीन दिसंबर 2017 को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। उनकी एकेडमी से ठीक होने वाले लम्भुआ के जितेंद्र कहते हैं कि रिशा मैम के अनुशासन व चिकित्सकों की निरंतर निगरानी के चलते वह ठीक हो गए और आज वह मोबाइल व टेंट की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। मानसिक बीमारी से निजात पाकर स्वस्थ हुए दुर्गापुर निवासी मनोज वर्मा पेंटिग कर जीवन यापन कर रहे हैं।

Edited By: Jagran