सुलतानपुर : रामलीला मैदान में चल रही रामलीला के नौवें दिन कलाकारों ने कुंभकरण व मेघनाथ वध का जीवंत मंचन किया। इसे देख पूरा पंडाल भाव विभोर हो उठा। लोगों ने जयश्री राम के नारे लगाए। अयोध्या से आए कलाकारों ने मंचन किया कि हनुमान जी किस प्रकार वाटिका में पहुंच कर सीता जी को श्रीरामचंद्र का संदेश सुनाने के उपरांत, उनसे फल खाने की आज्ञा लेते है, उसके बाद अक्षय कुमार का वध, हनुमान रावण संवाद, लंका दहन, सीता जी का संदेश श्रीराम तक पहुंचाना, विभीषण शरणागीत, समुंद्र में पुल बनाना, कपि सेना के साथ श्रीराम की समुंद्र पार करने की लीला सुंदर तरीके प्रस्तुत की। इसके बाद मेघनाथ का युद्ध में आना और उसका वध होने के उपरांत रावण कुंभकरण को नींद से जगाता है। कुंभकरण श्रीराम से युद्ध को तैयार नहीं होता है। फिर रावण कुंभ करण को मदिरा पान करण कर मद मस्त कर देता है, जिसके बाद कुंभ करण श्री राम के हाथों मारा जाता है। कलाकारों की हर एक प्रस्तुति बहुत ही सुंदर रही, जिसने श्रोताओं को कार्यक्रम स्थल तक बांधे रखा।

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निकली मेघनाथ व मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम-लक्ष्मण की झांकी

गुरुवार की शाम नगर की सड़कों पर मेघनाथ व मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम-लक्ष्मण की अलग-अलग झांकी निकली। रथों पर सवार रामलीला मैदान से योद्धाओं का रथ निकला। लखनऊनाका, सब्जीमंडी, चौक, गया प्रसाद चौराहा, जीएन रोड, डाकखाना चौराहा, शाहगंज होते हुए पुन: रामलीला में समाप्त हुई। लक्ष्मण व मेघनाथ दोनों योद्धाओं ने एक-दूसरे पर वाणों की वर्षा की लेकिन कोई हार मानने को तैयार नहीं दिख रहा था, लेकिन अंत में सत्य की विजय हुई और लक्ष्मण ने मेघनाथ का वध किया।

Edited By: Jagran