यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
'फलों के राजा' अब चायनीज केमिकल के हवाले, सेहत के लिए खतरनाक
कार्बाइड से आम पकाने की पुरानी परिपाटी रही है लेकिन अब यह भी महंगा पड़ने लगा है, 20 रुपये कार्बाइड ...और पढ़ें

सुलतानपुर (आशुतोष मिश्र)। फल के व्यापारी ग्राहकों की सेहत के साथ सौदा करने पर उतर आए हैं। अब तक कार्बाइड से पकाए जा रहे फलों के राजा आम को चायनीज केमिकल के हवाले कर दिया गया है। लगभग 40 प्रतिशत कम कीमत होने के नाते बाजार में उतरने के चंद माह बाद ही ये छा गए हैं।
अमहट की जिला मुख्यालय मंडी हो या नगर पंचायतों की छोटी बाजारें। हर जगह चाइनीज केमिकल से बनी पुड़िया रंगत दिखा रही है। हरे को पीला रंग देने में कम समय लगने से यह कारोबारियों के बीच हाथोंहाथ ली जा रही है। दशहरी हो या चौसा या फिर चुसुआ के नाम से प्रचलित सफेदा। सभी इसकी गरमाहट से पकाए जा रहे हैं।
वैसे तो कार्बाइड से आम पकाने की पुरानी परिपाटी रही है। लेकिन अब यह भी महंगा पड़ने लगा है। हाल ही में आए चायनीज केमिकल से बनी पुड़िया कम दिनों में ही बाजारों में छा गई है। 20 रुपये कार्बाइड के दाम हैं जबकि चायनीज पुड़िया का प्रति पैकेट कीमत महज आठ रुपये बताई जा रही है।
आधे से कम कीमत के चलते व्यापारी इसी से आम पकाने में उपयोग कर रहे हैं। चायनीज कैमिकल दो से तीन दिन में ही आम को पीला रंग दे देता है, जो कुछ हरा रंग लिए रहते हैं। वे स्टाक भी सप्लाई के दौरान ही पीले रंग में आ जाते हैं।
इसके चलते आम का अधिक स्टाक व्यापारियों को नही बनाना पड़ता। तीन दिन के अंतराल पर बाग से आने वाली आवक उपभोक्ताओं के बीच पहुंच जाती है। हालांकि यह रसायन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन कारोबारी उपभोक्ताओं के साथ नजरअंदाज कर रहे हैं।
ऐसे भी पकाए जाते हैं आम: कंडे के धुएं और एसी मशीनों से फलों को अधिकृत रूप से पकाने की व्यवस्था है। जिसमें सप्ताह से 10 दिन का समय लगता है। चौबीस घंटे निगरानी की जाती है। कहीं ठंडी या गर्मी अधिक हुई तो फलों में सड़न शुरू हा जाती है। यह प्रक्रिया लंबी और खर्चीली होती है। जिसके चलते मांग के सापेक्ष आम की आपूर्ति नहीं हो पाती है। इससे बचने के लिए व्यापारियों ने नया हथकंडा अपनाया है।
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कार्रवाई का आधिकार नहीं: अफसरमंडी सचिव सुरजीत सिंह कहते हैं कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन के निरीक्षक इसकी जांच करते हैं। मंडी निरीक्षक को केमिकल से पकने की जांच करने व कार्रवाई का अधिकार नहीं है। जिला उद्यान अधिकारी मीना देवी के मुताबिक चायनीज केमिकल प्रतिबंधित है। यह स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है।
