राहुल गांधी के बाद अब अखिलेश यादव की होगी सुलतानपुर कोर्ट में पेशी, 22 वर्ष बाद भी नहीं मिली मुआवजा की रकम
Akhilesh Yadav: सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में अखिलेश यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव

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संवाद सूत्र, सुलतानपुर । इटावा के सैफई महोत्सव में 22 वर्ष पहले हुई घटना में घायल हुए मोहम्मद अली ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दाखिल किया है। इसमें पूर्व सीएम अखिलेश यादव व उनके निजी सचिव गजेंद्र सिंह पर एफआइआर लिखे जाने की मांग की गई है।
मोहम्मद अली के प्रार्थनापत्र को एमपी एमएलए कोर्ट में स्वीकार किया गया है। विशेष मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गोसाईगंज थाने से रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही अगली सुनवाई सात नवंबर 2026 को तय की है।
गोसाईगंज थाने के सुरौली गांव के मोहम्मद अली ने आरोप लगाया कि तत्कालीन स्वर्गीय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में 24 दिसंबर 2004 को सैफई महोत्सव में वह अन्य लोगों के साथ बैनर लगा रहे थे। तभी करंट की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। वह घायल हो गया।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उनके पक्ष में 15 लाख पांच हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जारी किया था। उन्हें यह धनराशि नहीं मिली। इसके लिए उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव व उनके निजी सचिव गजेंद्र सिंह से भी कई बार मुलाकात किया पर काम नहीं बना। उनको सब जगह से केवल आश्वासन ही मिला।
पीड़ित के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि दिसंबर वर्ष 2004 में सैफई महोत्सव की तैयारियां चल रही थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और तत्कालीन सांसद अखिलेश यादव के निर्देश पर बिजली विभाग काम कर रहा था। वहां भारी अव्यवस्था थी और बिजली के तार खुले पड़े थे।
इसी दौरान काम कर रहे सुल्तानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के सुरौली गांव निवासी मोहम्मद अली समेत तीन लोग करंट की चपेट में आ गए। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि मोहम्मद अली गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे के बाद अखिलेश यादव के संज्ञान में पूरा मामला लाया गया। पीड़ित परिवार को पार्टी फंड से इलाज और मुआवजे के लिए 15 लाख 5 हजार रुपये देने का लिखित आश्वासन दिया गया। अखिलेश यादव के हस्ताक्षर से एक चेक भी जारी किया गया, लेकिन जब पीड़ित परिवार बैंक पहुंचा तो खाते में पैसा ही नहीं था। इसके बाद से लगातार आश्वासन ही मिलते रहे, पैसा नहीं मिला। परिवाद में सबसे गंभीर आरोप यह है कि निजी सचिव गजेंद्र सिंह ने जीवित मोहम्मद अली का ही फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। अधिवक्ता का दावा है कि उस प्रमाण पत्र पर गजेंद्र सिंह के ही हस्ताक्षर हैं।
इंसाफ न मिलने पर पीड़ित ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत रेमेडी के लिए निचली अदालत जाने का आदेश दिया। इसी क्रम में सुल्तानपुर MP/MLA कोर्ट में FIR दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया है।
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