जागरण संवाददाता, दुद्धी (सोनभद्र) : अमवार में चार दशक से निर्माणाधीन कनहर ¨सचाई परियोजना को तय समय सीमा में पूरा होना योगी सरकार की उपलब्धि होगी। इससे अतिदुरूह व पिछड़े क्षेत्र में करीब डेढ़ सौ किमी की परिधि में लगभग पांच लाख से ऊपर की आबादी की लाइफ स्टाइल में भी तेजी से परिवर्तन हो जायेगा।

उत्तर प्रदेश, झारखंड एवं छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा पर कनहर-पांगन संगम तट पर विकास क्रांति की धूरी के रूप में 1976 से निर्माणाधीन कनहर ¨सचाई परियोजना अब तक के सफरनामे में वक्त के कई थपेड़ों का सामना किया है। सत्तर के दशक के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी से लेकर मायावती व अखिलेश यादव तक के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार रहने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना के सार्वजनिक मंचों से लोकार्पण करने संबंधी उनकी हसरत पूरी नहीं हो पाई है। कभी राजनीतिक एवं नौकरशाही इच्छा शक्ति की कमी तो कभी बजट रूपी विकराल समस्याओं से जूझने वाली इस परियोजना को योगी राज में बजट रूपी संजीवनी मिल चुकी है। इस महत्वपूर्ण परियोजना को वर्तमान में सिर्फ शासकीय एवं प्रशासकीय प्रबल इच्छा शक्ति की आवश्यकता है। वर्तमान परिवेश में सभी संसाधन मौजूद होने के बावजूद परियोजना निर्माण की प्रगति रिपोर्ट काफी ¨चतनीय है। इससे दिली लगाव रखने वाले तमाम अभियंताओं के स्थानांतरण एवं प्रशासनिक खेमे में लगातार परिवर्तन होने का सीधा असर परियोजना निर्माण के साथ ही विस्थापन समस्या पर पड़ रहा है। बदले परिवेश में तैनात हुए कुछ लोग अब इसे महज चरागाह के रूप में देखने लगे हैं। जो परियोजना के भविष्य को लेकर ¨चता का कारण बनती जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीते करीब एक साल की परियोजना निर्माण की प्रगति चार्ट के आंकड़े में कोई ़खास बदलाव नहीं हुआ है। पीढ़ी दर पीढ़ी परियोजना पूरा होने की आस में जी रहे तमाम बुजुर्गों को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद के तीसरे दौरे की भनक लगी तो वे उनसे सिर्फ जितना जल्दी हो सके इस महत्वपूर्ण परियोजना के लोकार्पण करने की मांग करते दिखे।

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