सोनभद्र में खेती से कमाई में हिस्सेदार बनेंगी समूह की महिलाएं, एफपीसी से खुलेगी स्वावलंबन की राह
सोनभद्र के चोपन और दुद्धी में एनआरएलएम ने फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) का गठन किया है, जिससे स्वयं सहायता समूह ...और पढ़ें

HighLights
एनआरएलएम ने चोपन और दुद्धी में एफपीसी का गठन किया।
महिलाओं को कृषि आय में 50% हिस्सेदारी का अवसर मिलेगा।
ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से स्वावलंबन की राह खुलेगी।
जागरण संवाददाता, सोनभद्र। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अब खेती-किसानी में केवल श्रम तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि कृषि कार्यों से होने वाली कमाई में भी उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की पहल की गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से जिले के चोपन और दुद्धी ब्लाक में गठित फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) से कृषि कार्यों में सक्रिय समूह की महिलाओं को जोड़ा जाएगा।
इसके लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। कंपनी के माध्यम से महिलाएं कृषि उपकरण, खाद और बीज की उपलब्धता आसान बनाने के साथ ही कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से भी जुड़ सकेंगी। इससे महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की राह तैयार होगी।
खेती में हिस्सेदारी से बढ़ेगी आय
एफपीसी से जुड़ने वाली समूह की महिलाओं को कृषि गतिविधियों से होने वाली आय में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी का अवसर मिलेगा। इससे महिलाएं खेती को केवल आजीविका के सहायक साधन के रूप में नहीं, बल्कि आय बढ़ाने वाले व्यवस्थित उद्यम के रूप में अपना सकेंगी।
कंपनी के माध्यम से सामूहिक रूप से कृषि कार्य करने और जरूरी संसाधन जुटाने में भी सहूलियत होगी। अलग-अलग स्तर पर कृषि सामग्री की व्यवस्था करने के बजाय कंपनी के माध्यम से जरूरत के सामान जुटाने से महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।
उपकरण से भंडारण तक अनुदान का सहारा
एफपीसी के माध्यम से कृषि कार्यों को विस्तार देने के लिए सरकारी अनुदान का लाभ भी मिल सकेगा। उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार, 10 हजार से पांच लाख रुपये तक के अनुदान का प्रविधान है। कृषि उपकरण प्राप्त करने से लेकर भंडारण की व्यवस्था विकसित करने तक के लिए सहायता मिल सकती है। इससे खेती से जुड़ी गतिविधियों को संगठित करने, उत्पादन के बाद उपज को सुरक्षित रखने और बाजार की जरूरत के अनुसार उत्पाद तैयार करने में मदद मिलेगी।
उत्पादों की ब्रांडिंग और बिक्री पर भी जोर
एफपीसी को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग का अधिकार मिलने से कृषि उत्पादों को बाजार में बेहतर तरीके से प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इससे महिलाओं की भूमिका उत्पादन तक सीमित न रहकर उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बिक्री तक विस्तारित हो सकेगी।
एनआरएलएम के मिशन प्रबंधक एमजी रवि ने बताया कि चोपन और दुद्धी में गठित एफपीसी से समूह की कृषि कार्यों से जुड़ी महिलाओं को जोड़ने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। उद्देश्य महिलाओं को कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आमदनी बढ़ाना और उन्हें स्वावलंबी बनाना है।
