जागरण संवाददाता, सोनभद्र : पूर्वांचल की मंडियों में खनिज संपदा का एकमात्र स्त्रोत सोनभद्र अभी भी धारा 20 के प्रकाशन का इंतजार कर रहा है। लंबे-लंबे वादे और शासन स्तर के बड़े अधिकारियों के दौरे के बाद भी वन व राजस्व विभाग के आपसी समन्वय न होने के कारण धारा 20 का प्रकाशन संभव नहीं हो पा रहा है। लंबी जद्दोजहद के बाद किसी तरह दुद्धी स्थित कोरगी बालू साइड को चालू किया गया है जो मांग की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं है। जिले में धारा 20 का प्रकाशन न होने के कारण 60 से अधिक पत्थर व बालू की खदानें चालू नहीं हो पा रही है। जिसके कारण प्रदेश सरकार को हर माह करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर गिट्टी व बालू की उपलब्धता न होने से अवैध खनन व कालाबाजारी अपने चरम पर पहुंच रही है। अच्छे दिन का सपना नहीं हुआ पूरा

जिले में खनन से जुड़े हजारों बेरोजगारों के अच्छे दिन का सपना अभी जल्द पूरा होता नहीं दिख रहा है। शासन स्तर पर जिले के छह चिह्नित गांव जहां पर खनन कार्य संचालित होना है वहां की भूमि को लेकर मचे विवाद का पटाक्षेप अभी जल्द होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों के अनुसार इन जगहों पर जनवरी के अंत तक ही धारा 20 का प्रकाशन होना था, लेकिन फरवरी शुरू होने के बाद भी इसको लेकर कोई सुबगुबाहट नहीं दिख रही है। जिसको लेकर आमजन में मायूसी छाती जा रही है। इन क्षेत्रों को होता लाभ

खनन विभाग के अनुसार धारा 20 के प्रकाशन से बिल्ली-मारकुंडी, बरदिया-सिदुरिया, अगोरी खास, ससनई व बरहमोरी में खनन कार्य शुरू हो जाता। विभागीय अधिकारियों के अनुसार जिले स्तर पर जितनी जानकारी शासन स्तर से मांगी गई थी वह समय से प्रेषित कर दिया गया था। अगर शासन स्तर से धारा 20 का प्रकाशन हो जाता तो लगभग 60 से अधिक खदानों का संचालन प्रारंभ हो जाएगा। इसमें सबसे अधिक खदानें पत्थर व 13 के आसपास बालू की खदानें संचालित होंगी। बिल्ली-मारकुंडी, बरदिया व सिदुरिया में धारा 20 के प्रकाशन से डोलो स्टोन पत्थर की खदानें खुल जातीं। यहां पर कुल 50 से अधिक नए पत्थर खदानें खुल सकेंगी। इसके अलावा अगोरी खास, ससनई व बरहमोरी में धारा 20 के प्रकाश होने से बालू की कम से कम 13 खदानें खुल जाएंगी, जिससे पूर्वांचल में बालू व गिट्टी के लिए मचे हाहाकार पर प्रभावी अंकुश लग जाएगा। क्या है धारा 20 व चार

भारतीय वन अधिनियम की धारा चार के तहत सरकार किसी भूमि को वन क्षेत्र में शामिल करने का प्रस्ताव दे सकती है। वहीं अधिनियम की धारा 20 के तहत वो भूमि अंतिम तौर पर वन क्षेत्र घोषित कर दी जाती है। विकास कार्य हो रहे प्रभावित

सोनभद्र में खनन कार्य रोजगार व राजस्व का प्रमुख कारक रहा है। पिछले कई वर्षों के दौरान बंदी के मार के कारण जहां एक तरफ हजारों श्रमिक बेरोजगार हो गए तो वहीं राजस्व वसूली पर भी इसका सीधा असर हुआ है। जिले से शासन को प्रति वर्ष लगभग एक हजार करोड़ रुपये राजस्व वसूली के रूप में प्राप्त होता है, जिसमें खनन का अंशदान बड़ा होता है। वहीं दूसरी ओर प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये डीएमएफ फंड के रूप जिले के विकास को प्राप्त होता है। खनन बंद होने से यह राशि पिछले काफी समय से प्रभावित रहा है। शासन के आदेश का इंतजार

धारा 20 के प्रकाशन को लेकर जो भी जानकारी जिले स्तर से शासन ने मांगी थी वह समय पर ही प्रेषित कर दिया गया था। अब सब निर्णय शासन स्तर से ही लेना है, जो भी आदेश होगा उसपर काम किया जाएगा। निश्चित रूप से धारा 20 के प्रकाशन से जिले के खनन क्षेत्र में पुन: रौनक लौट आएगी। केके राय, वरिष्ठ खान अधिकारी।

Posted By: Jagran

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