कॉमन इंट्रो..

जिला मुख्यालय राब‌र्ट्सगंज में बेतरतीब वाहनों के खड़ा होने, आटो के आड़े तिरछे खड़ी करने से आये दिन जाम लग रहा है। इसके साथ ही नगर क्षेत्र में कहीं भी पार्किंग व स्टैंड की व्यवस्था नहीं होने से समस्या और बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को जाम से दो-चार होना पड़ता है। इसमें मरीजों के साथ ही स्कूली बच्चों को भी दुश्वारी झेलनी पड़ती है। इतना ही नहीं जाम में फंसने से लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। यातायात के नियमों का अनुपालन न होने से उत्पन्न होने वाली समस्या से निजात दिलाने के लिए दैनिक जागरण ने पहल शुरू की है। इसके तहत लोगों व अधिकारियों के साथ मिलकर सात दिवसीय अभियान गुरुवार से शुरू किया गया। जिससे नगर में यातायात के लिए रूट चार्ट बन सके और लोगों को सुगम यातायात की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही आटो चालकों व पटरी व्यवसायियों को भी एक स्थान मिल सके।

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जागरण संवाददाता, सोनभद्र : राब‌र्ट्सगंज नगर में जाम की समस्या से कोई खास वर्ग ही नहीं बल्कि आम आदमी भी काफी प्रभावित होता है। दैनिक जागरण ने जाम के कारण, जाम की स्थिति और इससे होने वाले नुकसान की पड़ताल किया तो पता चला कि जाम का 80 फीसद कारण डग्गामार वाहन होते हैं। इससे आये दिन दुर्घटनाएं होती हैं और विवाद की भी स्थिति बनी रहती है। इतना ही नहीं लोगों का कीमती समय तो जाया होता ही है और जेब भी ढीली होती है।

देखा जाय तो नगर में सबसे ज्यादा जाम मेन चौक से लेकर लोक निर्माण विभाग के दफ्तर तक लगता है। इसका कारण यह है कि मेन चौक पर हर तरफ से आटो आते हैं। यातायात पुलिस की सक्रियता नहीं होने से डग्गामार वाहन भी बाजार में आ जाते हैं। इतना ही नहीं कई बार तो इसी नो-इंट्री जोन में बड़े वाहन भी आ जाते हैं जो जाम का सबसे बड़ा कारण होते हैं। सबसे खराब स्थिति तो दोपहर के समय होती है जब इसी रास्ते से स्कूली वाहन गुजरते हैं। इसी तरह धर्मशाला चौक, पन्नूगंज रोड पर महिला थाने के पास जाम ज्यादा लगता है। यह समस्या गत कई वर्षों से बनी हुई है। जिससे लोगों के साथ ही स्कूली बच्चों को भी परेशान होना पड़ता है।

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कितना होता है जाम से नुकसान

जाम के कारण प्रत्यक्ष तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से काफी नुकसान होता है। उदाहरण के तौर पर देखा जाय तो अगर आप बाइक से शाम के पांच या छह बजे रामगढ़ की ओर से आ रहे हैं और धर्मशाला चौक जाना है तो सीधे बाजार से जाने के दौरान करीब एक किमी की दूरी तय करने में 15 मिनट से कम नहीं लगेगा, जबकि रास्ता महज दो मिनट का है। ऐसे में 12 मिनट नुकसान हो जाता है। इतने देर पेट्रोल जला सो अतिरिक्त खर्च है। वहीं अगर चारपहिया वाहन से गुजरते हैं तो कई बार आधे-आधे घंटे तक जाम में फंसने की नौबत आ जाती है। ऐसे में एक दिन की सब्जी का खर्च को आपका जाम ही ले लेता है।

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जाम बढ़ाता है मां के दिल की धड़कन

जाम में फंसने से लोगों की जेब ढीली होती है, उनका समय जाया होता है इसके अलावा आयेदिन उन लोगों के दिल की धड़कन बढ़ जाती है जिनके बच्चे प्रतिदिन स्कूल जाते हैं। जब स्कूल की छुट्टी होती है और जाम लगता है तो नगर में रहने के बावजूद आधा घंटा से लेकर एक घंटे तक देर हो जाती है। ऐसे में उनके परिजन खासतौर मां के दिल की धड़कन बढ़ जाती है। वह ¨चतित होती हैं कि आखिर क्या बात है कि अभी तक लाडला स्कूल से नहीं आया।

Posted By: Jagran

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