जागरण संवाददाता, सोनभद्र : अंधेरों की अदालत ने मुझे मुजरिम करार कर फैसला सजाए मौत का दिया, कसूर मेरा सिर्फ इतना था जो कुछ किया सब उजाले में किया। यह पंक्ति जिले के उस शख्सियत की है, जो किसी पहचान का मोहताज नहीं है। हम बात कर रहे हैं समाजवादी आंदोलनों से जुड़े रहे वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर की। मजदूर आंदोलन से लेकर राजनीतिक के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाने वाले अजय शेखर ने साहित्य, राजनीति व सामाजिक क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। मधुरिमा साहित्य गोष्ठी की स्थापना कर लगातार 61 वर्ष से जिले में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कराने वाले अजय शेखर के मंच पर कवि गोपाल दास नीरज समेत हिदी व ऊर्दू अदब के कई बड़े कवि व गजलकार अपनी रचनाएं सुना चुके हैं। बेहद समृद्धिशाली कहे जाने वाले इस मंच ने कई नवोदित रचनाकारों को प्लेटफार्म दिया। डा. राम मनोहर लोहिया, महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला व आचार्य शांति त्रिवेदी से प्रभावित रहे। उन्हें वर्ष 2012 में नवरात्रि देवी जिदल ट्रस्ट ने दादा तुली मल जिदल सम्मान दिया व एक लाख रुपये की राशि भेंट किया। उन्हें हिदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्य महोपाध्याय, राष्ट्र गौरव, राष्ट्र ऋषि, रामप्यारे पनिका शिखर सम्मान, पं. चंद्रशेखर सम्मान, विध्य रत्न सोनरत्न समेत दर्जनों सम्मान व पुरस्कार से अलंकृत किया जा चुका है। अजय शेखर वर्तमान में वनवासी सेवा आश्रम गोविदपुर म्योरपुर के अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश गांधी स्मारक निधि संचालक मंडल के सदस्य, हिदी साहित्य सम्मेलन स्थाई समिति के सदस्य व मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के निदेशक के साथ ही अन्य साहित्यिक सामाजिक संगठनों के साथ सक्रिय हैं।

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