कामन इंट्रो...

अगर फुर्सत मिले तो पानी की तहरीरों को पढ़ लेना, हर इक दरिया हजारों साल का अफ्साना लिखता है..। जनपद में पानी का संकट कोई नया नहीं बल्कि बहुत पुराना है। इसे पाने के लिए लोगों ने क्या-क्या नहीं किया, पर दो लाइनों की ये पंक्तियां बहुत कुछ बयां करने के लिए सक्षम हैं। यहां के लोगों ने बहुत ठोकरें खायीं। पर परिणाम में प्रशासन ने कुछ नहीं दिया। स्थिति यह है कि आज भी लोग अपने घरों से काफी दूर जाकर सूखी हलक को तर करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

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जागरण संवाददाता, सोनभद्र : जनपद में तीन दर्जन पेयजल परियोजनाएं कागजों पर घुड़दौड़ कर रही हैं। उसमें स्थापना, लागत खर्च, टंकियों की क्षमता, गांवों की संख्या, आबादी के संतृप्त होने की जानकारी उपलब्ध है। इसकी तुलना में गांवों की जमीनी सच्चाई कुछ उलट है। टंकियां खुले आसमान को छूने को बेताब हैं लेकिन, ज्यादातर में पानी है ही नहीं। पाइप लाइनें हैं लेकिन, सड़ रही हैं।

घरों में कनेक्शन हैं लेकिन, परिवार के सदस्यों के हलक सूखे हुए हैं। गांवों में कई टोले हैं लेकिन, कुछ टोले संतृप्त तो कुछ में सूखे की स्थिति है। यानी जिला प्रशासन की तमाम कोशिशें व कागजों में दर्ज आंकड़ें गांवों की सच्चाई के आगे ऊंट के मुंह में जीरा सरीखा ही प्रतीत हो रहा है। एक नमूना ऐसा भी

36 पेयजल परियोजनाओं से समृद्ध जनपद के गांवों की स्थिति पेयजल के मामले में काफी निरीह है। परियोजनाओं पर शासन ने लंबा चौड़ा खर्च किया। व्यवस्थाएं दीं लेकिन, स्थानीय स्तर पर विभागीय हीला-हवाली के चलते पानी की समस्याएं बढ़ती ही गईं। इसमें एक है महुली ग्राम पंचायत। यहां पेयजल परियोजना काफी पुरानी है। कहने को तो इस योजना से 8300 लोगों के लिए पानी की आपूíत की जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि छह बस्तियों में से तीन बस्तियों में ही पानी जाता है। इसमें भी 30 घरों वाली यादव बस्ती में 10 घरों तक ही पानी पहुंचता है। कुराटोला, झझरी, गोंडबस्ती, नउवा बस्ती में पानी की आपूíत नहीं की जाती है। 400 में से 50 घरों में पानी

जनपद के धुर्पा ग्राम पंचायत में लगभग चार सौ घर हैं। यहां पेयजल परियोजना की स्थिति यह है कि 400 घरों के बदले 50 घरों में पानी आपूíत करने में सक्षम है। इसके इतर समस्याएं जो हैं भी उसे विभागीय स्तर से हल नहीं किया जाता। प्राय: गांवों से विभाग की सच्चाई यह मिली कि जेई से शिकायत के बाद भी उसका निराकरण नहीं किया जा रहा है। यहां ग्रामीणों ने हैंडपंपों के रिबोर कराने की गुहार भी जिला प्रशासन से लगायी लेकिन प्रशासन ने ऐसा कराने से सीधे-सीधे मना कर दिया। अब स्थिति यह है कि ये ग्रामीण पेयजल के लिए जाएं तो कहां जाएं। एक साल के बदले लगे कई साल

यहां तो स्थिति यह है कि पेयजल परियोजनाएं ग्राम पंचायत के बगैर सहमति के ही डाक से हस्तांतरण प्रमाण पत्र भेजा जा रहा है। इसमें शामिल है वैनी पेयजल परियोजना। यहां के प्रधान मुरारी ¨सह ने यहां की कार्यप्रणाली को लेकर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजा। फिर वहां से सीएम व प्रमुख सचिव को अवगत कराया गया। जिसके एवज में जिला प्रशासन को आदेशित कर कार्य कराने का निर्देश दिया गया। मिली जानकारी के अनुसार यहां अब काम शुरू हुआ है, वह भी आधे मन से।

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क्या बोले ग्राम प्रधान

-पानी की आपूíत पहले होती रही है, अब आधे घंटे तक होती है। इसके लिए ग्रामीणों ने शिकायत भी की लेकिन, अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

- कुतुबुद्दीन, धुर्पा। - छह बस्तियों के लिए बनी महुली परियोजना से सिर्फ तीन बस्तियों में ही पानी जाता है। वह भी कुछ घरों में। इसमें भी बिजली कट जाय तो व्यवस्था भाग्य भरोसे हो जाती हैं। - सगंतु देवी, महुली। - पानी संकट एक साल की बात नहीं है। यह तो सालों साल से चलता आ रहा है। पेयजल संकट से ग्रामीण ज्यादातर गर्मी के दिनों में परेशान होते हैं। परियोजनाओं को समृद्ध करना जरूरी है। - राजकुमार गुप्त, शिवद्वार।

- एक साल में पूर्ण होकर काम करने वाली परियोजना को बीते तीन साल हो गए लेकिन, अभी तक कोई काम नहीं हुआ। काफी प्रयास के बाद दोबारा काम शुरू हुआ है। अब देखा जाए कि कब तो पूरा हो रहा है। - मुरारी ¨सह, वैनी। - भलुआ टोला में स्थित पेयजल परियोजना से पानी आपूíत घरों तक ठीक से नहीं हो पाता। इस प्रमुख कारण दबाव का नहीं बनना। इस संबंध में जेई से कहा गया लेकिन अभी तक उन्होंने बनाया नहीं।- गिरिजा जायसवाल, बिल्ली-मारकुंडी। - गांव के ज्यादातर घरों में पानी नहीं जाता। इसके लिए जेई से कहा गया लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं हुआ। इसके लिए फिर से शिकायत की जाएगी। -सुशील मौर्य, बलियारी। - एक महीने पहले जलनिगम के र्किमयों ने पाइप उखाड़ दिया। अब दुबेपुर के ज्यादातर घरों में पानी नहीं जा रहा है। यहां के जेई से शीघ्र बनाने को कहा तो उन्होंने आश्वासन ही सिर्फ दिया।

- गुलाब वनवासी, दुबेपुर। - पेयजल टंकी की क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। गांव की आबादी में बेतहाशा वृद्धि हुई लेकिन, उसके अनुरूप प्रशासन ने व्यवस्थाओं में विस्तार नहीं कराया।

- आशा जायसवाल, करमाचट्टी।

Posted By: Jagran