- अनपरा में कोयले का स्टाक एक लाख 25 हजार टन के पार

- लैंको परियोजना से विद्युत उत्पादन आधा होने से परेशानी

जागरण संवाददाता, अनपरा (सोनभद्र) : कोयले की कमी से 1200 मेगावाट क्षमता वाली निजी क्षेत्र की लैंको परियोजना से विद्युत उत्पादन आधा हो गया है। प्रदेश को सस्ती बिजली देने वाली यह परियोजना कोयला संकट से उबर नही पा रही है। परियोजना द्वारा विदेशी कोयला आयात करने का भी प्रयास विफल हो गया है। परियोजना में लगभग चार हजार टन के नीचे कोयले का स्टाक है। एमजीआर व सड़क मार्ग से अथक प्रयास किए जाने के बाद भी महज 10 हजार टन के आसपास कोयले की आपूर्ति हो पा रही है। निगम की सबसे बड़ी तापीय परियोजना अनपरा में निरंतर कोयले के स्टाक में वृद्धि हो रही है। 89.9 पावर लोड फैक्टर पर चल रही परियोजना में लगभग एक लाख 25 हजार टन कोयले का स्टाक हो गया है। इन दिनों प्रतिदिन 36 हजार टन खपत के सापेक्ष लगभग 42 हजार टन कोयले की आपूर्ति रेल व सड़क मार्ग से हो रही है। हरदुआगंज में भी 45 हजार टन कोयले का स्टाक हो गया है। इस परियोजना में प्रतिदिन 14 हजार टन कोयले की खपत हो रही है। ओबरा तापीय परियोजना में भी कोयले के स्टाम में निरंतर वृद्धि जारी है। परियोजना में 90 हजार टन कोयले का स्टाक बन गया है। इन दिनों प्रतिदिन 12 हजार टन कोयले की खपत हो रही है। पारीछा तापीय परियोजना में 41 हजार टन कोयले का स्टाक बना हुआ है। जबकि इस परियोजना में 10 हजार टन कोयले की प्रतिदिन खपत हो रही है। शनिवार को मौसम का पारा गिरने से बिजली की मांग व खपत में कमी बनी रही। प्रदेश में बिजली की अधिकत्तम मांग 21488 मेगावाट तथा न्यूनतम मांग 14006 मेगावाट के स्तर पर रहा। अनपरा अ परियोजना से 509 मेगावाट, ब परियोजना से 909 मेगावाट, डी परियोजना से 949 मेगावाट तथा लैंको परियोजना से शेड्यूल 660 मेगावाट के सापेक्ष 59 मेगावाट अधिक कुल 719 मेगावाट बिजली ग्रिड को दी गयी। अनपरा तापीय परियोजना की सभी इकाइयों द्वारा पूर्ण क्षमता से विद्युत उत्पादन किए जाने से निगम का उत्पादन शनिवार को 4186 मेगावाट से उपर बना रहा। प्रदेश के निजी क्षेत्र की बिजली घरों से 6008 मेगावाट विद्युत उत्पादन कराया गया।

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