जासं, सोनभद्र:बीते दिनों हुई गलतियों की पुनरावृत्ति न हो इसी के साथ स्वच्छ सोनभद्र, सुंदर सोनभद्र, शिक्षित सोनभद्र का नारा बुलंद करने के संकल्प के साथ जनपद की तीन बड़ी समस्याओं को शिक्षा के माध्यम से समाप्त करना है। बाल विवाह, बाल मजदूरी व शिक्षा का अभाव जनपद में शिक्षा का अभाव होने के कारण यहां के लोग बीमार पड़ने पर दवा बाद में और झाड़-फूंक पहले कराते हैं। इसकी वजह से यहां पर मृत्यु दर बढ़ जाता है। इस पर रोक लगाने के लिए मैं स्वयं प्रयास शुरू करूंगा। संकल्प को पूरा करने का संकल्प अहम होगा।

- डा.सुधीर कुमार मिश्र, प्रबंधक, प्रमोदजी महिला महाविद्यालय। भाईचारा बढ़ाने का संकल्प

नए वर्ष में मैं समाज के सभी वर्ग के लोगों में सौहार्द, भाईचारा बढ़ाने का संकल्प लेता हूं। देश के सभी लोगों में ईश्वर के प्रति कृतज्ञता बढ़ाने का संकल्प लिया हूं। राष्ट्र के सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, कोई भी बच्चा विद्यालय समय में विद्यालय के बाहर न रहे, उसे विद्यालय पहुंचाऊंगा। इसके अलावा दूसरों के द्वारा की गई गलतियों को माफ करना और खुद गलती न करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ने की पूरी कोशिश करूंगा। अहंकार इंसान को खत्म कर देता है। इसलिए नए साल से कोई भी अवगुण नजदीक न आने पाए, इसके लिए अपने आपको बचाने का संकल्प इस बार दोहराया हूं।

- संजय कुमार ¨सह, राब‌र्ट्सगंज, सोनभद्र। तन और मन को स्वस्थ रहने का संकल्प

अच्छी सेहत ही जीवन की कुंजी है। बीते साल में आपकी सेहत चाहे जैसी भी रही हो, अपनी सेहत को बेहतर बनाने का संकल्प मैंने नए साल में लिया है। साथ ही ¨जदगी को सुखमय बनाने के लिए अपने करीबी लोगों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया हूं। तन का ही नहीं, मन का भी ध्यान रखूंगा क्योंकि शरीर पूरी तरह फिट है लेकिन मन शांत नहीं तो दिक्कत होती है। बीमारी भी बढ़ने की आशंका रहती है। इस लिए दोनों को स्वस्थ रखने का संकल्प लिया हूं। नए साल से नए प्ला¨नग के साथ मैं खुद को स्वस्थ करूंगा।

- अमित विक्रम ¨सह, सेक्टर चार ओबरा, सोनभद्र।

सद्भाव से ¨जदगी सफल बनाने की योजना

शुभ समय में किया गया कार्य अवश्य ही निर्विघ्न रूप से चलता है। वैसे निरंतर सछ्वाव को गति देना अहम कर्तव्य होना होता है। जिसके लिए हमें संकल्पित होना जरूरी है। मैं इस बार यहीं संकल्प लिया हूं कि सद्भाव से ¨जदगी को सफल बनाऊंगा। सकारात्मक व सृजनात्मक कार्यों को गति देने के लिए बहुत से विकारों को अपने जीवन से हमें दूर करना होगा तभी परोपकार की भावना जन-जन तक पहुंचेगी। लोगों में आपसी सामंजस्य स्थापित कर पाना संभव होगा। परोपकार से प्रेरित जीवन ही कुशल व्यवहार को बनाये रखने का भी संकल्प दोहराया हूं।

- अर¨वद सोनी, ओबरा सोनभद्र।

Posted By: Jagran

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