जागरण संवाददाता, सोनभद्र : जिला प्रशासन की मुहिम अगर रंग लाई तो निश्चित ही अगले साल में मई ऐतिहासिक साबित होने वाली है। अभी तक मई व जून में टैंकर के पास लोटा-बाल्टी लेकर घरों से दौड़ लगाने वाले लोगों को अगले वर्ष मई जून में अगर ऐसा कुछ करने की नौबत नहीं आयी तो यह तय हो जाएगा कि सोनांचल के लोगों के लिए नया बिहान होने वाला है। अबकी फीकी-फीकी सुबह उस दौरान उजाला सरीखा प्रतीत होने लगेगी। इसी धुंधली तस्वीर में उज्ज्वल करने का प्रयास जिला प्रशासन की ओर से इस समय किया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार वर्मा रोजाना पोखरों के गहरीकरण को लेकर अपने अधीनस्थ अधिकारियों से जायजा लेते रहते हैं।

जनपद में पानी की भारी दिक्कत को देखते हुए दैनिक जागरण ने खुद एक पहल करके जलदान अभियान के तहत जनपद के तालाबों व दूसरे जलस्त्रोतों की पड़ताल शुरू की थी। इस क्रम में यहां के मौजूदा जलाशयों की स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट कर दी गई। इस अभियान के महत्व को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी जनपद में मौजूद तालाबों के गहरीकरण व नवनिर्माण के कार्य को शुरू करने का निर्णय लिया। जल संकट जैसी विकराल समस्या को जड़ से नेस्तनाबूद करने के लिए मुख्य विकास अधिकारी का प्रयास रोजाना दोगुनी क्षमता के साथ जारी है।

विकास के काम में छिपा है रोजगार-

जिला प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर पोखरों के गहरीकरण का कार्य करा रहा है। इसमें एक उद्देश्य लोगों को पानी के संकट से मुक्ति दिलाना है तो वहीं दूसरे इसी के जरिए मजदूरों को नियमित मजदूरी भी मिल रही है। आधुनिकीकरण के वातावरण में जहां कामों की निर्भरता मशीनों पर होती जा रही है वहीं प्रशासन ने इस काम के लिए मनरेगा मजदूरों से सहयोग लेकर उसे रोजगार का मौका भी दिया है। बता दें कि हजारों की संख्या में मजदूर मारे-मारे घूमने के लिए मजबूर हैं। ऐसी दशा में मनरेगा के तहत मिले काम से कुछ मजदूरों में एक आशा की किरण उभर आयी है। हालांकि यह रोजगार अल्प समयावधि के लिए है लेकिन, रोजगार सृजन ऐसे ही विकास कार्यों में छिपा हुआ है। उसे उभारकर बेरोजगार मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। प्रयास की हो रही सराहना

जनपद के चोपन, राब‌र्ट्सगंज, घोरावल, नगवां, खलियारी, बभनी, अनपरा सहित दूसरे क्षेत्रों में हो रहे पोखरों के गहरीकरण व नवनिर्माण की चहुंओर सराहना हो रही है। जल संकट से जूझ रहे नागरिकों के लिए यह कार्य किसी जीवनदायिनी से कम नहीं है। जनपद का बहुत बड़ा हिस्सा जल संकट की भीषण तबाही से गुजर रहा है। ग्रामीणों को शुद्ध पानी तो दूर प्रदूषित पानी भी नसीब नहीं हो रहे हैं। हैंडपंप जवाब दे गये हैं। सबमर्सिबल की स्थिति और भी भयावह हो गई है। इस हालात से उबारने के लिए लोगों ने जिला प्रशासन के कदम कदम की सराहना की है। लोगों में एक उम्मीद जगी है कि हर साल की अपेक्षा इस बार पोखरों के गहरीकरण के कारण बारिश के पानी को कुछ हद तक अधिक मात्रा में संरक्षित किया जा सकेगा।

Posted By: Jagran

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