सोनभद्र में एक हादसा और 12 किलोमीटर तक थम गई जिंदगी, किसी की ट्रेन छूटी तो किसी का कारोबार प्रभावित
सोनभद्र में वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर दो भारी वाहनों की टक्कर से 12 किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे चार घंटे ...और पढ़ें

सोनभद्र में भीषण सड़क हादसा, वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर 12 KM लंबा जाम, जनजीवन अस्त-व्यस्त।
HighLights
सोनभद्र में भारी वाहनों की टक्कर से भीषण जाम।
वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर 12 किलोमीटर तक यातायात बाधित।
हजारों लोगों की दिनचर्या, व्यापार और यात्रा प्रभावित हुई।
जागरण संवाददाता, रेणुकूट (सोनभद्र)। किसी को दफ्तर पहुंचने की जल्दी थी तो किसी को ट्रेन पकड़नी थी। कोई जरूरी काम से निकला था तो किसी को कारखाने तक माल पहुंचाना था। लेकिन वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर हुए एक हादसे ने हजारों लोगों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया।
पिपरी थाना क्षेत्र के गाढ़ा बैरियर के समीप गैस फैक्ट्री के पास सोमवार सुबह दो भारी वाहनों की टक्कर के बाद करीब 12 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। लगभग चार घंटे तक लोग सड़क पर फंसे रहे। यह महज वाहनों की कतार नहीं थी, बल्कि हजारों लोगों के समय, मेहनत और पैसे का नुकसान था।
सोमवार सुबह करीब आठ बजे राखड़ लदा एक ट्रक वाराणसी की ओर जा रहा था। यातायात का दबाव होने के कारण उसकी रफ्तार धीमी थी। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे राखड़ लदे ट्रेलर ने ट्रक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद आगे चल रहे तीन से चार वाहन भी एक-दूसरे से टकराते चले गए। हादसे में दो भारी वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर सड़क के बीचोंबीच फंस गए।
अन्य वाहनों को मामूली नुकसान पहुंचा और उनके चालक किसी तरह आगे निकल गए। गनीमत रही किसी को भी कोई चोट नहीं आई। शुरुआत में छोटे वाहन सड़क के किनारे से निकलते रहे, लेकिन सड़क पर पर्याप्त पटरी नहीं होने और भारी वाहनों के फंसने से जाम बढ़ता चला गया। देखते ही देखते वाहनों की कतार करीब 12 किलोमीटर तक पहुंच गई। जाम में आधा दर्जन से अधिक रोडवेज बसें, सवारी वाहन, निजी कारें, दोपहिया वाहन, कॉलेज बसें और मालवाहक ट्रक फंसे रहे।
बसों में बैठे यात्रियों के लिए तीन घंटे का इंतजार किसी मुसीबत से कम नहीं था। किसी की ट्रेन छूट गई तो कोई जरूरी बैठक और कार्यालय नहीं पहुंच सका। विद्यार्थियों की कक्षाएं प्रभावित हुईं तो नौकरीपेशा लोगों को समय पर कार्यालय पहुंचने की चिंता सताती रही। कई यात्री इंतजार से परेशान होकर अपना सामान लेकर पैदल ही गंतव्य की ओर निकल पड़े। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। किसी को भूख-प्यास की चिंता थी तो कोई अपने जरूरी काम छूटने से परेशान था। आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों के लिए भी ऐसा जाम बड़ी चुनौती बन सकता है।
इसका असर केवल आम यात्रियों तक सीमित नहीं रहता। औद्योगिक क्षेत्र में कारखानों तक कच्चा माल पहुंचाने और तैयार माल बाहर भेजने वाले वाहन भी जाम में फंस गए। निर्धारित समय पर माल नहीं पहुंचने से परिवहन व्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों की समय-सारिणी प्रभावित होती है। ट्रक चालकों को समय पर डिलीवरी नहीं देने पर ट्रांसपोर्टर और संबंधित कंपनी की नाराजगी झेलनी पड़ती है।
घंटों वाहन खड़े रहने से डीजल की खपत बढ़ती है और वाहन का औसत भी प्रभावित होता है। वहीं, माल की ढुलाई में देरी से कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, यातायात व्यवस्था संभालने वाले विभाग के कर्मचारियों को भी घंटों मौके पर रहकर जाम खुलवाने में मशक्कत करनी पड़ती है। इस तरह सड़क पर लगा एक जाम आम आदमी की दिनचर्या से लेकर कारखानों के कामकाज तक को प्रभावित करता है।
जाम खुलवाने के लिए मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने क्रेन मंगवाकर क्षतिग्रस्त वाहनों को हटवाने का प्रयास शुरू किया। हालांकि, भारी वाहनों का वजन अधिक होने और उनकी स्थिति बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण एक क्रेन से उन्हें किनारे करना संभव नहीं हो पा रहा था। इसके बाद दूसरी क्रेन की व्यवस्था कराई गई। काफी मशक्कत के बाद वाहनों को सड़क से हटाने की कार्रवाई शुरू हुई।
इस दौरान यातायात व्यवस्था संभालने में पुलिसकर्मियों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग पर ओवरलोड वाहनों का लगातार दबाव, फोरलेन सड़क की कमी और सड़क के दोनों ओर पर्याप्त पटरी नहीं होना जाम की प्रमुख वजह है। कई स्थानों पर सड़क और उसके किनारे की जमीन के बीच ऊंचाई का अंतर होने से छोटे वाहन चाहकर भी किनारे से नहीं निकल पाते। यदि सड़क के बराबर पटरियों का निर्माण करा दिया जाए तो छोटे वाहनों को निकलने का रास्ता मिल सकता है। हालांकि, इसके साथ ओवरलोड वाहनों पर भी प्रभावी अंकुश लगाना जरूरी है।
क्षेत्र के लोगों की परेशानी अब फिल्म 'अतिथि तुम कब जाओगे' की तर्ज पर हो गई है। यहां अतिथि तो चले जाते हैं, लेकिन जाम और दुर्घटनाएं जाने का नाम नहीं लेतीं। हर हादसे के बाद सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है और हजारों लोगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि किसी की ट्रेन छूटती है, किसी का जरूरी काम अधूरा रह जाता है, किसी की नौकरी और कारोबार प्रभावित होता है तो किसी कारखाने तक समय पर माल नहीं पहुंच पाता। ऐसे में प्रशासन को केवल हादसे के बाद जाम खुलवाने तक सीमित न रहकर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए। ओवरलोड वाहनों पर सख्ती और सड़क किनारे पटरियों का निर्माण ही इस रोज-रोज की परेशानी को काफी हद तक कम कर सकता है।
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