नैमिषारण्य: क्षेत्र के बकैनिया निवासी कमल कुमार दस वर्ष से लुधियाना में एक होजरी कंपनी में श्रमिक के तौर पर काम करते थे। वहां 15 हजार रुपये मिलता था। लॉकडाउन में काम बंद हो गया तो वह घर चले आए। यहां खेतों में मजदूरी शुरू कर दी है। कमल कहते हैं कि अब घर में ही रहेंगे। राशन कोटे से मिलने लगा है। मनरेगा में जॉब कार्ड बन जाएगा तो काम भी मिल जाएगा। यहीं के राजेश पत्नी व चार बच्चों के साथ लुधियाना में थे। वहां से आए तो यहां स्वास्थ्य परीक्षण कराकर क्वारंटाइन रहे। इसके बाद अपनी दो बीघा पुश्तैनी जमीन पर तरोई की बुआई की है। तरोई बेंचकर खर्च चला रहे हैं। राजेश ने कहा कि वह अपनी जमीन पर ही सब्जी का काम करेंगे। गांव के मन्नीलाल भी लुधियाना में थे। वहां रिक्शा चलाकर जीवन यापन करते थे। लॉकडाउन में रिक्शा समेत घर आ गए। घर की दो बीघा जमीन पर मूंगफली बोई है। जब तक फसल तैयार नहीं होती मजदूरी कर रहे हैं। तय कर लिया है कि यहीं खेती करेंगे।

गांव के रमाकांत लुधियाना में सिलाई काम करते थे। यहां आकर रमाकांत ने मनरेगा में काम शुरू कर दिया है। वह कहते हैं कि सरकार ने जॉब कार्ड बनाकर काम दे दिया। इससे उनको खाली बैठना नहीं पड़ा।

सब्जी की खेती करेंगे प्रवासी

बकैनिया के विनीत, श्रवण, कमलेश, अन्नू भी पंजाब से लौट आए। यहां आकर खेतों में सब्जी की खेती शुरू कर दी है। इन लोगों ने बताया कि पंजाब से गांव तक आने में बहुत दिक्कतें हुई। सरकार ने बसों की व्यवस्था न की होती तो वहीं भूखे पड़े रहते। यहां आकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया, क्वारंटाइन रहना पड़ा। इस दौरान राशन किट भी मिली। इनके पास दो से तीन बीघा जमीन है। इन लोगों ने बताया कि तरोई, मूंगफली, टमाटर, आलू, प्याज की खेती करेंगे। ग्रामसभा में जो भी प्रवासी आए उनको प्राथमिकता से मनरेगा में काम दिया है। इनको राशन भी दिया गया है। कुछ लोगों ने अपनी जमीन पर खेती, किसानी का काम भी शुरू किया है। अपने स्तर से इनकी मदद भी कर रहे हैं।

तन्नू सिंह यादव, प्रधान बकैनिया

Posted By: Jagran

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