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सीतापुर की उपासना की अनूठी पहल, कूड़े से कराहते तालाबों को दिलाई नई जिंदगी; स्वच्छता और जल संरक्षण का छेड़ा अभियान

Published: Tue, 13 Oct 2026 10:01 PM (IST)

लखनऊ विश्वविद्यालय से एमएससी कर लौटीं उपासना सिंह ने सीतापुर के संडौर गांव में कूड़े और गंदगी से पटे तालाबों ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. कूड़े और गंदगी से पटे तालाबों को दिलाई नई जिंदगी।

  2. ग्राम प्रधान के सहयोग से सोकपिट, डस्टबिन लगवाकर स्वच्छता फैलाई।

  3. ग्रामीणों को स्वच्छता, जल संरक्षण और जैविक खेती के प्रति जागरूक किया।

धीरेंद्र मिश्र, महमूदाबाद (सीतापुर)। गांव की गलियों में बिखरा कूड़ा हो या गंदगी से पटे तालाब। उपासना सिंह ने इन समस्याओं को देखकर गांव की तस्वीर बदलने का संकल्प ले लिया। संघर्षों के बीच उन्होंने स्वच्छता की ऐसी मुहिम छेड़ी जिससे ग्रामीण भी जुड़ते चले गए। अब गांव की गलियां साफ हैं और तालाबों में कूड़े-प्लास्टिक की जगह स्वच्छता नजर आ रही है। ग्राम प्रधान के सहयोग से उपासना स्वच्छता के साथ जल संरक्षण और जैविक खेती के प्रति भी ग्रामीणों को जागरूक कर रही हैं।

पहला ब्लाक के संडौर गांव की उपासना सिंह ने लखनऊ विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में एमएससी की पढ़ाई पूरी की। करीब तीन वर्ष पहले वह गांव लौटीं तो सड़कों के किनारे बिखरी पालीथीन, कूड़े के ढेर और गंदगी से भरे तालाबों ने उनका ध्यान खींचा। तालाबों की बदहाली ने वह सबसे अधिक विचलित हुईं। जिन तालाबों में मछलियां तैरनी चाहिए थीं, वहां पालीथीन और कचरा उतराता दिखाई देता था। दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को भी परेशानी होती थी।

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उपासना ने गांव को स्वच्छ बनाने के साथ जलस्रोतों को बचाने का बीड़ा उठाया। शुरुआत गलियों और सड़कों के आसपास बिखरी पालीथीन व कूड़े को हटाने से की। धीरे-धीरे गांव के अन्य युवा भी उनके अभियान से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने तालाबों में गंदगी पहुंचने के कारणों को दूर करने की पहल की। ग्राम प्रधान ऊषा देवी के सहयोग से घरों के गंदे पानी की निकासी के लिए सोकपिट बनवाए गए। घरों में डस्टबिन रखवाए गए। इन प्रयासों से तालाबों में गंदे पानी और पालीथीन की समस्या कम हुई।

चौपाल लगाकर करतीं जागरूक
उपासना का अभियान सफाई तक ही सीमित नहीं है। वह जगह-जगह चौपाल लगाकर ग्रामीणों को स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी समझाती हैं। साथ ही किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका प्रयास गांव को स्वच्छ रखने की ग्रामीणों में आदत डालना है।

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